मैनपुरी में साइबर ठगी के अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार
गरीब लोगों के नाम पर खुलवाते थे बैंक खाते, दिल्ली-NCR के मास्टरमाइंड तक पहुंचाते थे खातों की जानकारी
संवाददाता पंकज मिश्रा
मैनपुरी। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में मैनपुरी पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। SOG, सर्विलांस और साइबर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने देशभर में साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान शेखर, सुनील गुप्ता और रुकुम के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, एक चार पहिया वाहन और नकदी समेत अन्य सामान बरामद किया है।
गरीबों को रुपये का लालच देकर खुलवाते थे खाते
पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को रुपये देने का लालच देकर उनके नाम पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाते थे। खाता खुलवाने के बाद उसमें करीब एक हजार रुपये डालकर उसे सक्रिय किया जाता था। इसके बाद बैंक से मिलने वाली किट, एटीएम कार्ड और नया सिम कार्ड आरोपियों द्वारा अपने कब्जे में ले लिया जाता था।
आरोपियों द्वारा इन बैंक खातों और सिम कार्ड से संबंधित जानकारी दिल्ली-NCR में बैठे गिरोह के कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचाई जाती थी। इसके बाद इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को मंगाने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
साइबर पोर्टल की शिकायतों से खुला राज
साइबर क्राइम पोर्टल पर लगातार सामने आ रही शिकायतों की जांच के दौरान पुलिस को इन संदिग्ध बैंक खातों और लेन-देन के बारे में जानकारी मिली। जांच को आगे बढ़ाते हुए SOG, सर्विलांस और साइबर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी और आखिरकार गिरोह से जुड़े आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
पेट्रोल पंपों के जरिए ठगी की रकम निकालते थे
जांच में यह भी सामने आया कि साइबर ठगी के बाद बैंक खातों में आने वाली रकम को पेट्रोल पंपों के माध्यम से स्वाइप या ट्रांसफर कर नकदी में बदला जाता था। इसके एवज में करीब दो प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। इस तरीके से साइबर ठगी की रकम को कैश में बदलकर गिरोह के सदस्य आगे इस्तेमाल करते थे।
छह मोबाइल और चार सिम समेत सामान बरामद











