मस्जिद-ए-इस्लामिया का भव्य उद्घाटन: एक ऐतिहासिक पल
रोहतास के शहर डेहरी ऑन सोन में आज का दिन इस्लाम गंज (ईदगाह मोहल्ला) के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। लंबे इंतजार और अकीदतमंदों की अटूट आस्था के बाद, आज मस्जिद-ए-इस्लामिया का विधिवत उद्घाटन संपन्न हुआ। इस रूहानी मौके पर आयोजित जलसे में हज़ारों की संख्या में जनसैलाब उमड़ा।
प्रमुख उलेमाओं का संबोधन
कार्यक्रम की रौनक बढ़ाने के लिए कई बड़े दिग्गज उलेमा तशरीफ लाए, जिन्होंने अपने कीमती बयानों से अवाम के दिलों को मुनव्वर किया। उलेमाओं ने अपने संबोधन में मुख्य रूप से तीन बातों पर जोर दिया:
समाज का केंद्र: मस्जिदें केवल इबादत की जगह नहीं, बल्कि समाज के सुधार और तालीम (शिक्षा) का मरकज़ भी हैं।
सामूहिक प्रयास: इस्लाम गंज के नौजवानों और बुजुर्गों की दिन-रात की मेहनत और सहयोग का ही नतीजा है कि आज यह भव्य मस्जिद बनकर तैयार हुई।
शांति का संदेश: समाज में अमन, शांति और एकता को बढ़ावा देना ही दीन की असल सीख है।

इलाके में जश्न का माहौल
मस्जिद को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से दुल्हन की तरह सजाया गया था। स्थानीय लोगों ने आने वाले मेहमानों और उलेमाओं का गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। पहली नमाज़ के बाद एक सामूहिक दुआ की गई, जिसमें मुल्क की तरक्की, खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए खुदा की बारगाह में हाथ फैलाए गए।
विशेष आभार: मस्जिद-ए-इस्लामिया के मुतवल्ली सैयद मुजफ्फर आलम एवं पूरी मस्जिद कमेटी ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आए हुए सभी जायरीन का शुक्रिया अदा किया।












