सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की जमीन पर बढ़ता कब्जा: कुंडा ब्लॉक के कई स्कूल खतरे में, राजस्व विभाग की चूक उजागर
संवाददाता – आदित्य द्विवेदी की रिपोर्ट
सभ्यताओं की नर्सरी कहे जाने वाले प्राथमिक विद्यालय आज खुद अस्तित्व संकट से गुजर रहे हैं। कुंडा तहसील के विकास खंड बिहार से एक बड़ी और गंभीर खबर सामने आई है, जहाँ कई सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की जमीनों पर स्थानीय रसूखदारों ने कब्जा जमा लिया है। सरकारी अभिलेखों में दर्ज जमीन और मौके पर मौजूद जमीन—दोनों में भारी अंतर पाया गया है।
शिक्षा विभाग के सूत्रों ने खुलासा किया है कि
प्राथमिक विद्यालय बिहार
प्राथमिक विद्यालय सिया
प्राथमिक विद्यालय पूरे लोसना
इन तीनों विद्यालयों के नाम पर भूलेख में दर्ज जमीन मौके पर मौजूद नहीं है। यह ही नहीं, बल्कि ऐसे आधा दर्जन से अधिक विद्यालय चिन्हित किए गए हैं जहाँ दर्ज भूमि की तुलना में वास्तविक जमीन काफी कम पाई गई है।
कहाँ चूक रहा तंत्र?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विद्यालय, अस्पताल और श्मशान जैसे सार्वजनिक उपयोग की जमीनें भी बचाई नहीं जा सकीं, तो आम नागरिकों की जमीनों की सुरक्षा कैसे संभव है? क्या प्रशासन की चूक और राजस्व विभाग की लापरवाही इतनी गहरी हो चुकी है कि सरकारी संपत्तियाँ भी सुरक्षित नहीं रहीं? स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या समाज को आगे बढ़कर ऐसे अतिक्रमणों का विरोध नहीं करना चाहिए? क्या प्रधानी का चुनाव लड़ने वालों के लिए यह मुद्दा प्राथमिकता नहीं बनना चाहिए?
सभ्यता से जुड़े संसाधन खतरे में
जल, जंगल और जमीन—मानव सभ्यता की आधारशिला माने जाते हैं। लेकिन लगातार इन पर संकट गहराता जा रहा है। यदि राजस्व विभाग ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले समय में इन विद्यालयों का अस्तित्व खतरे में पड़ना तय है।
आरटीआई एक्टिविस्ट और पत्रकारों के लिए खुला आह्वान
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, आरटीआई कार्यकर्ताओं और जिम्मेदार पत्रकारों को इस संवेदनशील विषय पर संज्ञान लेने और जमीनी जांच शुरू करने का निमंत्रण दिया जाता है। यदि समाजहित में काम करने का जज्बा रखते हैं, तो विद्यालयों की जमीनों पर अवैध कब्जे जैसे मुद्दे पर ठोस पहल की आवश्यकता है












