स्मार्ट मीटर का ‘स्मार्ट’ संकट: बिल गायब, बैलेंस अस्पष्ट, अलीगढ़ में उपभोक्ता बेहाल
मंडल संवाददाता: अमित चौहान
अलीगढ़। स्मार्ट मीटर लगाने का दावा करने वाला बिजली विभाग अब अपने ही सिस्टम में उलझता नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि मीटर तो बदल दिए गए, लेकिन उपभोक्ताओं के बिजली बिल गायब हो गए हैं। नई व्यवस्था के बाद रीडिंग और बैलेंस को लेकर लोगों में भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। शहर में बड़े पैमाने पर लगाए गए स्मार्ट मीटर अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। कई इलाकों में डेढ़ से दो महीने पहले मीटर बदल दिए गए, लेकिन बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को फरवरी माह का बिल अब तक नहीं मिला है। इससे उपभोक्ता अपने वास्तविक बकाए को लेकर असमंजस में हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत करने पर हर बार यही जवाब मिलता है कि मीटर अब प्रीपेड हो चुका है और बिल मोबाइल पर आ जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है—न तो मोबाइल पर कोई बिल आ रहा है और न ही ऑनलाइन पोर्टल पर नई जानकारी अपडेट हो रही है। पोर्टल पर अब भी पुराना भुगतान ही दिख रहा है, जिससे लोगों को यह समझ नहीं आ रहा कि उनका वास्तविक बकाया कितना है। मीटर बदलने के साथ ही बिना किसी स्पष्ट सूचना के उपभोक्ताओं को पोस्टपेड से प्रीपेड सिस्टम में शिफ्ट कर दिया गया। इस बदलाव को लेकर न तो पहले कोई जागरूकता अभियान चलाया गया और न ही बाद में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए। नतीजा यह है कि उपभोक्ता अपने ही कनेक्शन की स्थिति समझने के लिए बिजली दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब अचानक नेगेटिव बैलेंस दिखाकर कनेक्शन काट दिए जाते हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अब तक 31 हजार से अधिक कनेक्शन इसी आधार पर काटे जा चुके हैं। उपभोक्ताओं का सवाल है कि जब बिल ही नहीं मिला, तो बकाया कैसे तय कर लिया गया।
इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारी भी स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं। मुख्य अभियंता पंकज अग्रवाल का कहना है कि स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड करने की प्रक्रिया लखनऊ स्तर से संचालित हो रही है और जल्द ही ऑनलाइन पोर्टल पर बैलेंस दिखाई देने लगेगा। साथ ही उपभोक्ताओं को आवश्यक जानकारी देने का दावा भी किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई












