सुलतानपुर मेडिकल कॉलेज फिर विवादों में: विधायक ने लगाए भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप, जांच की मांग
संवाददाता: आयशा अल गजल
सुलतानपुर का राजकीय मेडिकल कॉलेज एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में आ गया है। सदर विधायक राज प्रसाद उपाध्याय ‘राज बाबू’ ने कॉलेज प्रशासन पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
यह मामला इसलिए भी खासा संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पर भी पहले भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं और उनके खिलाफ लोकायुक्त जांच पहले से जारी है। वर्तमान प्रभारी प्राचार्य को भी पूर्व प्राचार्य का करीबी बताया जा रहा है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
विधायक ने उठाए तीन बड़े मुद्दे
विधायक राज बाबू ने अपने पत्र में तीन प्रमुख बिंदुओं पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं—
1. बिना अनुमति स्टाफ की छंटनी
विधायक के अनुसार, 25 मार्च 2026 को मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कई डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को बिना किसी पूर्व अनुमति के कार्यमुक्त कर दिया। उनका कहना है कि इस कार्रवाई के लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा से अनुमति नहीं ली गई, जो नियमों के खिलाफ है।
2. CMS पद पर नियम विरुद्ध तैनाती
दूसरा बड़ा आरोप मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) की नियुक्ति को लेकर है। विधायक ने आरोप लगाया कि लेवल-3 के एक डॉक्टर को अपर निदेशक मंडल अयोध्या की अनुमति के बिना ही CMS का कार्यभार सौंप दिया गया, जो सेवा नियमों का उल्लंघन है।
3. डिजिटल सिग्नेचर के दुरुपयोग से वित्तीय अनियमितता
मामले का सबसे गंभीर पहलू डिजिटल सिग्नेचर के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। विधायक का आरोप है कि नियम विरुद्ध तरीके से पदभार दिलाने के बाद डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल कर वित्तीय लेनदेन किए गए। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला बड़े वित्तीय भ्रष्टाचार में बदल सकता है। डीएम से निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग विधायक ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने और जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की भी बात कही है।
उच्च स्तर तक पहुंचा मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक ने अपने पत्र की प्रतिलिपि अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा शिक्षा) और महानिदेशक (चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण) को भी भेजी है, ताकि उच्च स्तर पर भी इस प्रकरण में हस्तक्षेप हो सके। इस पूरे घटनाक्रम ने सुलतानपुर मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और जांच के बाद क्या सच्चाई सामने आती है।












