चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़
2016 के बाद पहली बार ऐसा जलप्रकोप
स्टेट संवाददाता विष्णु रावत. उत्तर प्रदेश के धार्मिक नगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी इस समय अपने रौद्र रूप में है। 2016 के बाद पहली बार नदी में इतनी भीषण बाढ़ दर्ज की गई है। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है, जिससे शहर के प्रमुख घाट — रामघाट, भरतघाट और अन्य घाट पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं।
बाढ़ का पानी सिर्फ घाटों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास की सैकड़ों दुकानों और दर्जनों होटलों में भी घुस गया है। इससे व्यापारियों और स्थानीय लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रशासन ने की सावधानी बरतने की अपील
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी के किनारे न जाएं और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर शरण लें। राहत और बचाव कार्यों के लिए टीमें तैनात कर दी गई हैं, जबकि पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें भी निगरानी में जुटी हैं।
श्रद्धालुओं की आवाजाही पर लगी रोक
रामघाट और भरतघाट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पानी भरने के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है। मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन मिलकर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पिछले कई वर्षों में नदी को इतना उफनते नहीं देखा। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो हालात और भी बिगड़ सकते हैं।
स्थिति पर नजर बनाए हुए है प्रशासन
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है और पीड़ितों के लिए अस्थायी शिविर भी लगाए जा रहे हैं।
नदी के रौद्र रूप से श्रद्धालु और स्थानीय निवासी चिंतित
चित्रकूट जैसे धार्मिक और पर्यटन स्थल पर ऐसी स्थिति चिंता का विषय है। स्थानीय लोग प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसे हालात से निपटा जा सके।
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