जनपद एटा में सात-आठ साल से जलभराव में डूबा बैरनी गांव, गलियों में 2 से 3 फीट पानी
संवाददाता योगेन्द्र सिंह
नालियों की निकासी व्यवस्था ध्वस्त, गंदे पानी और संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा; ग्रामीणों ने एसडीएम से लगाई गुहार
जलेसर/एटा। तहसील जलेसर क्षेत्र के ग्राम बैरनी में पिछले सात-आठ वर्षों से जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई है। गांव की गलियों में करीब दो से तीन फीट तक पानी भरा होने के कारण ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो गया है। समस्या से परेशान ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी जलेसर को प्रार्थना पत्र देकर जल निकासी और सफाई की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में गांव की स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। गलियों में लंबे समय तक गंदा पानी जमा रहने से जहां आवागमन बाधित होता है, वहीं स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर लोगों को पानी के बीच से होकर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार पहले गांव की गलियों का पानी नालियों के माध्यम से गांव से बाहर निकल जाता था। उनका आरोप है कि वर्ष 1985 में चकबंदी के बाद नाली का नक्शा तैयार होने के बाद जल निकासी की व्यवस्था प्रभावित हुई। इसके बाद करीब सात-आठ वर्ष पूर्व गली के सामने स्थित स्रोत पर बांध लगाए जाने से पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई।
मच्छरों का बढ़ा प्रकोप
लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण गांव में गंदगी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीणों को डेंगू, मलेरिया समेत अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा सता रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो समस्या और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों ने एसडीएम जलेसर से मामले का संज्ञान लेकर संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने तथा गांव में तत्काल जल निकासी, नालियों की सफाई और जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। प्रार्थना पत्र पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों के हस्ताक्षर भी किए गए हैं।











