अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की मौत पर बवाल

जी.टी. रोड स्थित जी.के. अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की मौत पर बवाल, परिजनों ने नर्स पर थप्पड़ मारने और अस्पताल पर लापरवाही का लगाया आरोप

लुधियाना के ग्यासपुरा चौक, जी.टी. रोड स्थित जी.के. अस्पताल के नाम से मशहूर एक निजी अस्पताल में प्रसव के बाद एक महिला की मौत पर जमकर हंगामा हुआ। मृतका की पहचान खुशबू देवी के रूप में हुई है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में घोर लापरवाही और दुर्व्यवहार का गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर शव रखकर जोरदार प्रदर्शन किया।

मिली जानकारी के अनुसार खुशबू देवी को 21 अक्टूबर को प्रसव के लिए जी.के. अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। परिवार के अनुसार उसी दिन दोपहर 3 बजकर 19 मिनट पर उसने सामान्य प्रसव के दौरान एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। डिलीवरी के तुरंत बाद अस्पताल स्टाफ ने मां और नवजात दोनों की हालत सामान्य और ठीक बताई, जिससे परिवार में खुशी का माहौल था।

लेकिन कुछ घंटों बाद ही खुशबू की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों का आरोप है कि रात होते-होते उसके पेट में तेज दर्द उठा और उसकी हालत बिगड़ती चली गई। आरोप है कि जब उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद नर्स को इसकी जानकारी दी और मदद मांगी तो नर्स ने मदद करने के बजाय उसके साथ दुर्व्यवहार किया। परिजनों ने यहां तक आरोप लगाया कि नर्स ने दर्द से तड़प रही खुशबू को 4-5 थप्पड़ मार दिए।

परिवार का कहना है कि इसके बाद भी अस्पताल की ओर से समय पर उचित उपचार नहीं दिया गया। महिला लगातार दर्द से तड़पती रही, लेकिन डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचे। स्थिति गंभीर होने पर वीरवार तड़के अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में उसे दूसरी जगह रेफर करने का फैसला लिया। पहले उसे दूसरे निजी अस्पताल और फिर एसपीएस अस्पताल रेफर किया गया।

परिजनों के अनुसार जब वे उसे लेकर एसपीएस अस्पताल पहुंचे, तो अस्पताल के गेट पर पहुंचते ही खुशबू ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इससे गुस्साए परिजनों ने जी.के. अस्पताल लौटकर अस्पताल के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान अस्पताल के बाहर नवजात बच्ची को गोद में लिए बैठी महिला की तस्वीर ने सभी को झकझोर दिया।

हंगामे के दौरान एक और आरोप सामने आया। परिजनों की ओर से पहुंचे राज सिंह ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने डॉक्टर से बात करनी चाही तो डॉक्टर ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। इससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

इधर अस्पताल प्रबंधन का पक्ष भी सामने आया है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि प्रसव के बाद महिला को लगभग 33 हजार रुपये के बिल की जानकारी दी गई थी। डॉक्टर का कहना है कि स्थिति की जानकारी परिवार को दे दी गई थी और हालत गंभीर होने पर उन्हें तुरंत रेफर कर दिया गया था। तड़के करीब साढ़े तीन बजे तक अस्पताल से छुट्टी दी गई, जबकि परिजनों ने सुबह करीब 10 बजे हंगामा शुरू किया।

घटना की सूचना मिलते ही थाना डिवीजन नंबर छह की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। थाने के एसएचओ प्रमोद राज ने बताया कि पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के कारणों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

वहीं मृतका के परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनकी मांग है कि प्रसव वाले कमरे की सीसीटीवी फुटेज को जब्त कर उसकी जांच की जाए, ताकि यह पता चल सके कि प्रसव के समय और उसके बाद कौन-कौन से चिकित्साकर्मी मौजूद थे और किस स्तर पर लापरवाही बरती गई।

इस घटना ने एक बार फिर शहर के जी.टी. रोड और ग्यासपुरा इलाके में चल रहे निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक सामान्य प्रसव के बाद कैसे एक जवान महिला की जान चली गई। फिलहाल नवजात बच्ची स्वस्थ बताई जा रही है, लेकिन मां की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

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