लेखपाल की मिलीभगत से हो गया सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा
– जांच के बाद भी डीएम को भेज दी गलत रिपोर्ट
अमौली, फतेहपुर । योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के दावों के बीच भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। सरकारी बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जे का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। लेखपाल और स्थानीय जिम्मेदारों की शह पर माफिया धड़ल्ले से बिना अराजी नंबर और गाटा संख्या के जमीनें खरीद-बेच रहे हैं।
बता दें कि चाँदपुर थाना क्षेत्र के अमौली कस्बे में भूमाफिया बेखौफ हैं। राजकुमार वर्मा पुत्र स्व. रामपाल निवासी धमिना खुर्द ने आरोप लगाया कि अमौली कस्बे में उनके मकान के बगल, गाटा संख्या 747 के पास, कस्बा निवासी सुशील ने निर्माण कार्य शुरू कराया है। जबकि उसके नाम केवल दो बिस्वा जमीन का बैनामा है, कब्जा चार बिस्वा पर कर लिया गया है। जिलाधिकारी से शिकायत पर राजस्व विभाग ने मौके पर नाप कराई थी। नाप के बाद बैनामे की जमीन छोड़ बाकी जमीन को सुरक्षित रखने हेतु लेखपाल और प्रधानपति को सुपुर्द किया गया था लेकिन आरोप है कि सुविधा शुल्क की लालच में लेखपाल ने बची जमीन भी सुशील को कब्जा करा दी है। शिकायतकर्ता राजकुमार ने अमौली चौकी में प्रार्थना पत्र देकर सरकारी जमीन कब्जामुक्त कराने की मांग की है।
बताते चलें कि अमौली कस्बे में तैनात लेखपाल पूर्व से विवादित है उसने आरआरसी सेंटर के नाम पर सरकारी जमीन पर प्रधानपति का मकान बनवा दिया था। बाद में अधिवक्ता पूर्णेंदु अग्निहोत्री की शिकायत पर डीएम के निर्देश पर अवैध मकान को ध्वस्त कराया गया था लेकिन मामले में अभी तक न ही अवैध कब्जेदारो के खिलाफ एफआईआर हुई और न ही मामले पर फर्जी रिपोर्ट लगाकर बचाने का प्रयास करने वाले लेखपाल पर गाज गिरी। यही वजह है कि लेखपाल के हौसले बुलंद हैं।
ये भी पढ़ें प्रयागराज: पूर्व विधायक अब्बास अंसारी की याचिका पर कल हाईकोर्ट सुनाएगा फैसला












