करोड़ों की लागत से बना वीरांगना अवंती बाई मेडिकल कॉलेज, ‘सफेद हाथी’ साबित
संवाददाता – योगेंद्र सिंह एटा.करोड़ों रुपये की लागत से बना वीरांगना अवंती बाई मेडिकल कॉलेज, एटा मरीजों के लिए इलाज का केंद्र न होकर ‘लापरवाही का गढ़’ बन चुका है। यहां न तो बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं और न ही आवश्यक स्टाफ तैनात। हालात यह हैं कि मरीजों और उनके परिजन अपनी जान जोखिम में डालकर खुद ही संघर्ष करने को मजबूर हैं।
मरीजों की जान से खिलवाड़
किदवई नगर की रहने वाली शबनम की ननद डिलीवरी के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचीं। लेकिन तीन घंटे तक उन्हें एडमिट स्लिप तक नहीं मिल पाई। काउंटर पर कोई स्टाफ मौजूद नहीं था, जिसके कारण डिलीवरी का इलाज समय पर शुरू ही नहीं हो सका।
बुजुर्ग ने पत्नी को खुद धकेला स्ट्रेचर
इसी अस्पताल में रामनरेश नामक बुजुर्ग अपनी विकलांग पत्नी को इलाज के लिए लाए। स्ट्रेचर तो मिल गया लेकिन उसे धकेलने के लिए कोई स्टाफ उपलब्ध नहीं था। मजबूरी में बुजुर्ग ने अपनी पत्नी को अस्पताल के गेट से लेकर पांचवीं मंजिल तक खुद ही धकेला।
आखिर बजट कहां जाता है?
प्रश्न यह उठता है कि करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद जब मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं तो आखिर यह बजट कहां जा रहा है?
जनता सवाल कर रही है कि क्या सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ कागजों में सिमटी हुई हैं? या फिर एटा का यह मेडिकल कॉलेज जनता की जान के साथ खिलवाड़ करने वाला ‘सफेद हाथी’ ही साबित होगा।
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