हिंदी वह प्रेम की धागा है,जो पूरे देश को एक सूत्र में बांधती है- – अर्जुन युवराज
हिंदी के महत्व और उसकी उपयोगिता को दर्शाने के लिए हर वर्ष संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को हिंदी दिवस धूम-धाम से मनाया जाता है।हिंदी हमारी राजभाषा, मातृभाषा और संस्कृति की पहचान है।
हिंदी दिवस के पावन अवसर पर उक्त बातें तरैया प्रखण्ड के नेवारी निवासी माध्यमिक हिंदी शिक्षक,समाजसेवी सह उच्च माध्यमिक विद्यालय गोवा पीपरपाती,बनियापुर के शैक्षणिक प्रभारी अर्जुन युवराज ने कहा। हिंदी सिर्फ भाषा ही नहीं बल्कि हमारे सस्कृति का अभिन्न हिस्सा है जो भारत के सांस्कृतिक विविधता में एकता के महत्वपूर्ण कड़ी के साथ ही हमारी पहचान का महत्वपूर्ण बुनियाद है।हिंदी प्रेम का वह धागा है जो देश के विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोगों को एक सूत्र में बांधती है।
वर्तमान परिवेश में हिंदी के संदर्भ में युवावों से क्या अपेक्षा किया जाए जो फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल एप पर डेटिंग,चैटिंग और सेटिंग के माया जाल में बुरी तरह फसते नजर आ रहे हैं जिससे हमारी मातृभाषा का ह्रास हो रहा है।हमें गर्व होना चाहिए कि हिंदी हमारी अपनी एक समृद्ध भाषा है। हमें हिंदी बोलने, लिखने और पढ़ने में रुचि लेनी चाहिए और इसे आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। हिंदी हमारी शान है और इसका सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।
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