जानिए नकली दवाओं का काला सच, जानलेवा जहर की पहचान कैसे करें।

जानिए नकली दवाओं का काला सच, जानलेवा जहर की पहचान कैसे करें।

संवाददाता करन कुमार विश्वकर्मा 

स्वास्थ्य। जी हां दोस्तों आप पैकेजिंग और दवा दोनों की अच्छी तरह से जांच करके और केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही खरीदारी करके नकली दवाओं की पहचान कर सकते हैं। यदि आपको कोई संदेह हो, तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें। इसके अलावा आपको बताते चलें कि पैकेजिंग की जांच आवश्य करें ।

क्यूआर कोड स्कैन करें: ₹100 से ज़्यादा कीमत वाली कई दवाओं पर क्यूआर कोड प्रिंट करना अनिवार्य है। इस कोड को स्कैन करने पर दवा के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है, जिससे प्रामाणिकता की पुष्टि होती है। इसके अलावा आपको बताते हैं चलें कि भारत में नकली दवाओं का कारोबार बहुत बड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिवर्ष लगभग ₹32,000 करोड़ से ₹88,000 करोड़ के बीच नकली दवाईयां मेडिकल स्टोर के माध्यम से बाजार में बेची जाती हैं। इससे न संबंधित कंपनी एवं देश को आर्थिक नुकसान होता है बल्कि मरीज की जान पर भी खतरा आ सकता है।इसलिए आज हम एनसीआईबी मुख्यालय द्वार प्रकाशित इस आर्टिकल के माध्यम से सरल भाषा में समझते है कि नकली दवाईयों से होने वाला नुकसान, पहचान का तरीका एवं बचाव का उपाय क्या है:

1. नकली दवाओं का नुकसान—-

• दवा नकली होने पर असर न के बराबर करेगी, इससे मरीज की बीमारी बढ़ सकती है या मौत भी हो सकती है।

• नकली दवा बीमारी को ठीक करने की बजाय और गंभीर बना देती है। जो कभी कभी जानलेवा हो सकती है।

• लोग मरीज के इलाज पर पैसे तो खर्च करते हैं पर फायदा नहीं मिलता। इससे मरीज परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

• नकली दवाईयों के कारण फायदा न होने पर लोगों का डॉक्टर, दवा दुकानों और हेल्थ सिस्टम पर भरोसा कम हो जाता है।

बचाव के आसान तरीके —

• हमेशा रजिस्टर्ड एवं अपने घर के नजदीक या फिर किसी परिचित वाले मेडिकल स्टोर से दवा खरीदे, किसी अनजान जगह से दवा कभी न खरीदें।

• दवाइयां खरीदने के बाद बिल या फिर मेडिकल स्टोर का नाम प्रिंटेड कैश मेमो अवश्य लें। नकली दवाईयों को बेचने वाला अक्सर बिल नहीं देता।

• सही दवा पर स्पेलिंग साफ, MRP, बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट होती है। पैकिंग फटी-पुरानी या धुंधली छपी हुई दिखे तो सावधान ऐसी दवाईयां न ले।

• अब अधिकतर कंपनियाँ पैकेट पर क्यूआर कोड देती हैं, उसे मोबाइल से स्कैन कर असली दवा की पहचान की जा सकती है।

• अगर दवा खाने के बाद बीमारी पर असर नहीं पड़ रहा है, तो तुरंत डॉक्टर को बताएं और वही दवा दोबारा न खरीदें। साथ ही, किसी प्रकार का संदेह होने पर ड्रग कंट्रोल ऑफिस, हेल्थ डिपार्टमेंट या टोल-फ्री नंबर 1800-180-5533 पर शिकायत दर्ज कराए।

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