दीवाली पर संत रामपाल जी महाराज का विशेष संदेश: सच्ची दीपावली आत्मज्ञान से जीवन में उजाला लाना है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी दीपावली का पर्व पूरे देश में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर संत रामपाल जी महाराज ने अपने अनुयायियों और देशवासियों को विशेष संदेश देते हुए कहा कि “सच्ची दीपावली केवल दीये जलाने, मिठाइयाँ बाँटने या घर सजाने का नाम नहीं है, बल्कि यह वह अवसर है जब हमें अपने भीतर के अंधकार को दूर कर सच्चे ज्ञान का प्रकाश जलाना चाहिए।”
संत रामपाल जी महाराज ने कहा कि आज लोग बाहरी चमक-दमक में इतने खो गए हैं कि उन्होंने इस त्यौहार का वास्तविक अर्थ ही भुला दिया है। उन्होंने समझाया कि “दीपावली” का अर्थ है – दीप + आवली, यानी प्रकाश की पंक्ति। परंतु असली प्रकाश तब होता है जब मनुष्य अपने भीतर के अज्ञान, क्रोध, लोभ, मोह, और अहंकार जैसे अंधकार को समाप्त करता है और सच्चे परमात्मा के ज्ञान को अपने जीवन में धारण करता है।
महाराज जी ने अपने संदेश में कहा कि आज समाज में बढ़ती अंधविश्वास, नशाखोरी, हिंसा और स्वार्थ की भावना को समाप्त करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि सच्ची दीपावली तब होगी जब हर व्यक्ति अपने अंदर की बुराइयों को जलाकर, सच्चे सतगुरु के बताए मार्ग पर चलेगा। उन्होंने कहा, “अगर हम असली परमात्मा को पहचान लें और उनके बताए सतभक्ति मार्ग को अपनाएँ, तो हमारा जीवन भी उस दीपक की तरह उज्ज्वल हो जाएगा जो कभी बुझता नहीं।”
संत रामपाल जी महाराज ने लोगों से अपील की कि वे पटाखों के प्रयोग से बचें क्योंकि इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान होता है और कई निर्दोष जीव-जंतुओं को भी कष्ट पहुँचता है। उन्होंने कहा कि “सच्चे अनुयायी को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे किसी प्राणी को पीड़ा पहुँचे।” इसके बजाय, उन्होंने सुझाव दिया कि लोग इस अवसर पर जरूरतमंदों की मदद करें, गरीब बच्चों को कपड़े, मिठाइयाँ या किताबें दें — यही असली दीपावली का संदेश है।
उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार घर की सफाई दीवाली पर की जाती है, उसी प्रकार हमें अपने मन की भी सफाई करनी चाहिए। मन में जमा नकारात्मक विचार, ईर्ष्या और द्वेष को दूर कर प्रेम, शांति और करुणा का दीप जलाना ही सच्चा उत्सव है।
अपने संदेश के अंत में संत रामपाल जी महाराज ने कहा — “दीपावली केवल एक दिन का त्यौहार नहीं, बल्कि यह एक प्रेरणा है कि हम अपने जीवन को सतभक्ति के मार्ग पर ले जाएँ। तभी हमारे जीवन में सच्चा सुख, समृद्धि और शांति आएगी। जो मनुष्य सच्चे ज्ञान के प्रकाश में जीवन व्यतीत करता है, उसके लिए हर दिन दीपावली के समान पावन होता है।”
संत रामपाल जी महाराज के इस संदेश ने लाखों अनुयायियों को यह सोचने पर विवश किया कि क्या वे सच में दीपावली का असली अर्थ समझ पा रहे हैं? उनका यह प्रेरणादायी संदेश समाज में एक नई चेतना लाता है कि हमें केवल बाहरी दीप नहीं, बल्कि अपने अंतरमन के दीप को भी प्रज्वलित करना चाहिए।
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