भयहरण नाथ धाम क्षेत्रीय विकाश संस्थान के तत्वाधान में आयोजित 26 वें महाकाल महोत्सव में विराट कवि सम्मेलन हुआ सम्पन्न

भयहरण नाथ धाम क्षेत्रीय विकाश संस्थान के तत्वाधान में आयोजित 26 वें महाकाल महोत्सव में विराट कवि सम्मेलन हुआ सम्पन्न

सियासत हिन्दू मुस्लिम को जलाकर राख कर देना
– शाहिद सफर

” न मैं हिन्दू मुसलमान हूं न मैं सिख इसाई
एक अदद इंसान समझ लो, रिश्ते में बहन भाई
– कवि डा0 अशोक अग्रहरि

दैनिक चक्र प्रतापगढ़
ब्यूरो अवधेश चंद्र पांडेय

प्रतापगढ. प्रसिद्ध पांडव कालीन भयहरण नाथ धाम में महाशिवरात्रि के अवसर पर चार दिवसीय महाकाल महोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया,महोत्सव के समापन पर आखिरी दिन धाम के महासचिव समाज शेखर के मार्गदर्शन में ख्यातिलब्ध गीतकार डा0 अशोक अग्रहरि प्रतापगढ़ी के संयोजन एवं संचालन में विराट कवि सम्मेलन आयोजित किया गया. जिसमें स्थानीय के अलावां दूर दराज के‌ कवि एवं कवयत्रियों ने प्रतिभाग करते हुये‌ अपनी- अपनी विधा‌ में अमिट छाप छोड़ा, सभी कवियों एवं कवयत्रियों का अंगबस्त्र, माल्यार्पण तथा प्रशस्तिपत्र से सारस्वत सम्मान किया गया. ‌वरिष्ठ साहित्यकार जनकवि प्रकाश जी की अध्यक्षता तथा डा0 में कवि सम्मेलन का आगाज डा0 गीता पाण्डेय अपराजिता के वाणी बन्दना से हुआ, तत्पश्चात कवियों ने अपनी प्रस्तुति देना शुरू किया, लोकभाषा के चर्चित कवि श्री अनीस देहाती जी की रचना फागुनी रंग में लिपटी दिखी : ” इश्क जब हद से गुजर जाय तभी है होली, सिंह जब स्यार से डर जाय तभी है होली” युवा दिलों की धड़कन बन चुके कौशाम्बी से पधारे कवि सुजीत जायसवाल‌ की पंक्तियां भी प्रेरणास्पद रहीं,जिस पर खूब दाद मिली‌ : ” तीर्थ का पुण्यफल सब मिलेगा यहीं, भाग्य का‌ पुष्प सब के खिलेगा यहीं”
प्रयागराज की मशहूर कवयत्री डा0 नीलिमा मिश्रा ने अपने शेर ओ शायरी के फन का जादू बिखेरा, जिस पर भी खूब तालियां बजी:
” क्या बुरा है क्या-सही कहना,‌दिल्लगी हो तो दिल्लगी कहना”
प्रयागराज के गंगा यमुनी तहजीब के पक्षधर नामचीन शायर शाहिद सफर अपने कलाम से बड़ी बेबाकी से सियासी तंज कसते हुये श्रोताओं के दिल में उतरे, और जमकर तालियां बजी:
तिरंगे को बचा लेना मुझे चाक कर देना,
सियासत हिन्दू मुस्लिम की जलाकर राख कर देना
जो मर जाऊं वतन के नाम पर तो दोस्तों सुन लो
छिड़ककर गंगाजल तन पर सुपुर्देखाक कर देना”
ओज के उभरते हुये नये तेवर के प्रतापगढ़ के कवि देवा ठाकुर कल्कि ने पूरे जोशो खरोश में पढ़ा:
जब – जब बल पौरुष ढेर पड़ जाता है, मां भारती का एक शेर पैदा हो जाता है”
मुकामी ख्यातिलब्ध गीतकार , संचालक कवि डा0 अशोक अग्रहरि ने अपनी ताजा तरीन और असरदार रचना तरन्नुम में पढ़कर माहोल को एक नया आयाम बख्शा, जिस फर तालियों की गड़गड़ाहट और वाहवाहियों से श्रोताओं ने सचबयानी पर मुहर लगाई:
” सियासत पे कैसे करूं मैं यकीन
सभी एक जैसे कौड़ी के तीन
हैं रंग में रंगे एक जैसे सभी-
खुली पोल फाइल। जब एफस्टिन”
अन्य कवियों में हास्कवि आलोक वैरागी, अमरनाथ बेजोड़, श्याम मनमौजी,राज कुमार जाहिल,‌राजेश हर्षपुरी,विवेक सुमन,बरसाती अली इत्यादि ने भी काव्यपाठ किया, अधिवक्ता प्रेम कुमार त्रिपाठी प्रेम की रचनाओं ने सभी को आंदोलित किया.
संस्थान के कार्यवाहक अध्यक्ष लाल जी सिंह,अध्यक्ष राज कुमार शुक्ल, संरक्षक देवी प्रसाद मिश्र, हीरा लाल, व्यवस्था समिति के वरिष्ठ सदस्य राज किशोर मिश्र, राजेश मिश्र, हेमराज अग्रहरि, चौकी प्रभारी राजीव वर्मा, कार्यालय प्रभारी नीरज मिश्रा आदि ने चाक चौबन्द व्यवस्था में सक्रिय रहे ।

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