पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर के अन्तर्गत गौतमबुद्ध बालक इंटर कॉलेज, ग्रेटर नोएडा में NCC कैडेट्स के लिए साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक किया गया।
पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ़ पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्धनगर श्रीमती लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में, अपर पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था डॉ0 राजीव नारायण मिश्र के पर्यवेक्षण में पुलिस उपायुक्त साइबर श्रीमती प्रीति यादव के नेतृत्व में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं आमजन को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर पुलिस द्वारा व्यापक स्तर पर साइबर जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में साइबर पुलिस टीम द्वारा गौतमबुद्ध बालक इंटर कॉलेज, ग्रेटर नोएडा में NCC कैडेट्स के लिए साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं को वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के विभिन्न स्वरूपों, उनके दुष्परिणामों तथा उनसे बचाव के प्रभावी उपायों के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान NCC कैडेट्स, छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी, फर्जी कॉल एवं संदिग्ध लिंक, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े जोखिमों तथा UPI एवं अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों से होने वाली साइबर धोखाधड़ी के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
साइबर पुलिस टीम द्वारा बताया गया कि साइबर अपराधी विभिन्न प्रकार के प्रलोभन, भय एवं भ्रामक सूचनाओं का सहारा लेकर लोगों की व्यक्तिगत, वित्तीय एवं बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। अतः डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय सतर्कता बरतना और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं NCC कैडेट्स को विशेष रूप से जागरूक किया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, ATM PIN, पासवर्ड अथवा बैंक खाते से संबंधित गोपनीय जानकारी साझा न करें। किसी अज्ञात लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करने तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी निजी जानकारी, फोटो एवं अन्य संवेदनशील विवरण साझा करने से बचें।
इसके अतिरिक्त, अपने ऑनलाइन खातों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत पासवर्ड का उपयोग करने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्षम करने तथा सोशल मीडिया अकाउंट्स की सुरक्षा एवं गोपनीयता सेटिंग्स को नियमित रूप से जांचने के लिए प्रेरित किया गया।साइबर पुलिस टीम द्वारा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की जाने वाली धोखाधड़ी के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई।
बताया गया कि साइबर अपराधी स्वयं को पुलिस अथवा अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाते हैं और उनसे धनराशि की मांग करते हैं। ऐसी किसी भी कॉल या संदेश से घबराने के बजाय उसकी सत्यता की पुष्टि करें तथा किसी के दबाव में आकर धनराशि ट्रांसफर न करें।
इसी प्रकार, ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया और डिजिटल भुगतान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी विस्तार से समझाया गया, ताकि विद्यार्थी स्वयं सुरक्षित रहने के साथ-साथ अपने परिवार एवं आसपास के लोगों को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक कर सकें।
कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों को डिजिटल तकनीक का सुरक्षित, सतर्क एवं जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने तथा साइबर अपराधों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया गया।
साथ ही बताया गया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो उसे बिना विलंब साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए तथा अपनी शिकायत आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल www.cyber crime.gov.in पर दर्ज करानी चाहिए। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से संबंधित कार्रवाई में सहायता मिल सकती है।
कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर पुलिस द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम, डिजिटल सुरक्षा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने तथा नागरिकों को साइबर अपराधियों के तरीकों से अवगत कराने के उद्देश्य से निरंतर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
पुलिस द्वारा आमजन से अपील की जाती है कि वे साइबर सुरक्षा संबंधी सावधानियों का पालन करें, अपनी गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखें तथा किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना तत्काल संबंधित हेल्पलाइन अथवा पुलिस को दें।पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर











