सब्ज़ बाग दिखा कर दुनिया ने तुम्हे खरीद लिया
तुम ना खुद के रहे
ना किसी और के हुए
बस दुनिया के तमाशे में खोए रहे।
तुम ना रब के हुए
ना खुद के हुए
बस दुनिया के तमाशे में खोए रहे
भुलाकर जन्नत को
तुम दुनिया को ही जन्नत कहते रहे।
आयशा अल ग़ज़ल
सब्ज़ बाग दिखा कर दुनिया ने तुम्हे खरीद लिया
तुम ना खुद के रहे
ना किसी और के हुए
बस दुनिया के तमाशे में खोए रहे।
तुम ना रब के हुए
ना खुद के हुए
बस दुनिया के तमाशे में खोए रहे
भुलाकर जन्नत को
तुम दुनिया को ही जन्नत कहते रहे।
आयशा अल ग़ज़ल