मेरठ: अवैध निर्माण का बढ़ता जाल और ‘मिलीभगत’ का सवाल
संवाददाता पवन सूर्यवंशी जनपद मेरठ
मेरठ। जनपद में अवैध निर्माण का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आपको बताते चलें एक निर्माण जिसमें 20 से 25 दुकानों का परिसर तैयार किया जा रहा है मवाना में गुड मंडी देव चौधरी नामक व्यक्ति का बताया जा रहा है ऐसे ना जाने कितने निर्माण हैं तमाम अभियानों और सख्त चेतावनियों के बावजूद, सड़कों के किनारे और अंदरूनी इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से इमारतें खड़ी हो रही हैं। एक अवैध निर्माण कार्य मवाना जॉन d4 में गुड मंडी के पास देव चौधरी नामक व्यक्ति का चल रहा है लगभग 500 गज के आसपास अवैध व्यवसाय परिसर जिसमें 20 से 25 दुकान का अवैध कमर्शियल निर्माण कार्य चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी और पूर्व में रहे अभियंता जितेंद्र के द्वारा कर रहे हैं यह निर्माण कार्य लगभग 5 माह से ज्यादा हो चुका है चलते हुए फिर भी इस अवैध निर्माण कार्य पर क्षेत्र के वर्तमान अभियंता नहीं पहुंच पाए और ना ही इस पर कोई कार्रवाई की गई है यह अभियंता जितेंद्र भ्रष्ट इतना हो चुका है कि अपने उच्च अधिकारियों को भी क्षेत्र में किसी प्रकार की जानकारी नहीं देता और स्वयं ही अपने आप को मेरठ विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष मानने लगता है और किसी भी निर्माण कार्य को हरी झंडी दिखाकर वह निर्माण को पूरा कर देता है जिस कारण उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व को हर महा करोड़ों रुपए की हानि होती है इनके चंद पैसे के लालच में मेरठ विकास प्राधिकरण के राजस्व की चोरी हो रही है यह सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि शहर के सुनियोजित विकास और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा बन चुका है। जो तस्वीर सामने आई है (जनपद मेरठ के तहसील मवाना गुड मंडी मेरठ) वह इस बात का एक और उदाहरण है कि अवैध निर्माण कितनी बेखौफ तरीके से चल रहा है।
अवैध निर्माण: कैसे मिलता है बल?
अवैध निर्माण की इस बाढ़ के पीछे सबसे बड़ा सवाल स्थानीय विकास प्राधिकरण (एमडीए), और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की भूमिका पर खड़ा होता है। इतने बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण कार्य क्या बिना किसी अधिकारी की मिलीभगत या अदेखी के संभव हैं? हाल ही में, मेरठ में कई बड़े अवैध निर्माणों पर कार्रवाई भी हुई है, जिनमें कैंट बोर्ड और एमडीए ने बुलडोजर चलाए हैं। अब्दुल्ला रेजिडेंसी जैसी सोसाइटियों और अन्य स्थानों पर अवैध कब्जों को ढहाया गया है। लेकिन इन बड़ी कार्रवाइयों के बावजूद, नए अवैध निर्माण तेज़ी से उग रहे हैं, जैसे कि यह रुक-रुककर चलाया जा रहा ‘खेल’ हो। कई खबरों में यह भी सामने आया है कि सील किए गए अवैध निर्माणों की सील तोड़कर काम जारी रखा गया, और यहां तक कि मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत के बाद कुछ व्यवसायिक शोरूमों को भी नोटिस जारी किए गए, जिनमें अधिकारियों की मिलीभगत के गंभीर आरोप लगे थे।
नियमों की अनदेखी और सुरक्षा को खतरा
ये अवैध ढांचे अक्सर बिना किसी उचित ले-आउट और सुरक्षा मानकों के बनाए जाते हैं। कृषि भूमि का भू-उपयोग बदले बिना कालोनियां काटना या आवासीय प्लॉट पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाना आम बात हो गई है। ऐसे निर्माण न सिर्फ शहर के मास्टर प्लान को बिगाड़ते हैं, बल्कि आग लगने या भूकंप जैसी आपात स्थितियों में ये भारी सुरक्षा जोखिम भी पैदा करते हैं। यह स्थिति दिखाती है कि केवल बुलडोजर चलाने से काम नहीं चलेगा। जब तक भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त और निर्णायक कार्रवाई नहीं होती, और जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक मेरठ में अवैध निर्माण का यह ‘जाल’ लगातार फैलता रहेगा। शहर को सुव्यवस्थित रखने के लिए यह ज़रूरी है
कि शासन-प्रशासन इस मिलीभगत की जड़ों पर प्रहार करे और अवैध निर्माण को शुरू होने से पहले ही रोके।












