Charak Hospital में अंधेरा: 45 मिनट तक टॉर्च की रोशनी में हुआ इलाज
संवाददाता: संतोष यादव, उज्जैन
उज्जैन संभाग के सबसे बड़े अस्पताल चरक अस्पताल में गुरुवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक बिजली गुल हो गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल प्रबंधन के पास जनरेटर में डीजल डलवाने तक की राशि उपलब्ध नहीं थी। परिणामस्वरूप करीब 45 मिनट तक मरीजों का इलाज अंधेरे में ही चलता रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली जाते ही वार्ड और ओपीडी में अंधेरा छा गया। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मोबाइल की टॉर्च और आपातकालीन लाइट के सहारे मरीजों की जांच और ड्रेसिंग करनी पड़ी। कई मरीज और उनके परिजन इस अव्यवस्था से घबराए नजर आए। हालांकि अस्पताल में लगे यूपीएस सिस्टम के चलते ओपीडी के कंप्यूटर चालू रहे, जिससे मरीजों की पर्चियां बनती रहीं और पंजीयन प्रक्रिया पूरी तरह बाधित नहीं हुई। लेकिन वार्डों में भर्ती मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
मरीजों और परिजनों में नाराजगी मरीजों के परिजनों ने बताया कि संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में इस प्रकार की लापरवाही बेहद गंभीर है। उनका कहना है कि यदि किसी गंभीर मरीज की स्थिति बिगड़ जाती तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
विकास के दावों पर सवाल
यह घटना उज्जैन के विकास के दावों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। एक ओर शहर में आधुनिक सुविधाओं की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल जैसी बुनियादी सेवा में इस तरह की कमी चिंताजनक है।
प्रशासन से जवाब की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर लापरवाही पर क्या कदम उठाता है और मरीजों को बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस व्यवस्था की जाती है।












