आंगनबाड़ी भर्ती में भ्रष्टाचार का आरोप, डीपीओ पर भी कार्रवाई की मांग

आंगनबाड़ी भर्ती में भ्रष्टाचार का आरोप, डीपीओ पर भी कार्रवाई की मांग

संवाददाता योगेन्द्र

एटा में आंगनबाड़ी भर्ती को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। चर्चा है कि नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले गए और दलालों के माध्यम से फर्जी नियुक्ति पत्र तक बांट दिए गए। सूत्रों के अनुसार करीब दो वर्ष पूर्व जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) संजय सिंह के कार्यकाल में कुछ दलाल सक्रिय हुए, जिन्होंने आंगनबाड़ी में संविदा पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर प्रति अभ्यर्थी लगभग एक लाख रुपये तक वसूले। आरोप है कि रुपये लेने के बाद अभ्यर्थियों को फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए गए, लेकिन आज तक उन्हें नौकरी नहीं मिल सकी।
बताया जा रहा है कि जब पीड़ित अभ्यर्थी या उनके परिजन अपना पैसा वापस मांगते हैं तो कथित दलाल उनसे अभद्र भाषा में बात करते हैं और धमकी भी देते हैं। पीड़ितों का आरोप है कि इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड विभाग का एक बड़ा अधिकारी है।
हाल ही में भ्रष्टाचार के मामले में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) पर कार्रवाई होने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच हो तो जिला कार्यक्रम अधिकारी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो डीपीओ के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब से संबंधित अधिकारी एटा में तैनात हुए हैं, तब से आंगनबाड़ी विभाग में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ी हैं। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इस पूरे मामले में किसी प्रकार का राजनीतिक या उच्चस्तरीय संरक्षण तो नहीं मिल रहा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या नहीं। आंगनबाड़ी भर्ती में भ्रष्टाचार का आरोप, डीपीओ पर भी कार्रवाई की मांग एटा में आंगनबाड़ी भर्ती को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। चर्चा है कि नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले गए और दलालों के माध्यम से फर्जी नियुक्ति पत्र तक बांट दिए गए। सूत्रों के अनुसार करीब दो वर्ष पूर्व जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) संजय सिंह के कार्यकाल में कुछ दलाल सक्रिय हुए, जिन्होंने आंगनबाड़ी में संविदा पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर प्रति अभ्यर्थी लगभग एक लाख रुपये तक वसूले। आरोप है कि रुपये लेने के बाद अभ्यर्थियों को फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए गए, लेकिन आज तक उन्हें नौकरी नहीं मिल सकी।
बताया जा रहा है कि जब पीड़ित अभ्यर्थी या उनके परिजन अपना पैसा वापस मांगते हैं तो कथित दलाल उनसे अभद्र भाषा में बात करते हैं और धमकी भी देते हैं। पीड़ितों का आरोप है कि इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड विभाग का एक बड़ा अधिकारी है।
हाल ही में भ्रष्टाचार के मामले में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) पर कार्रवाई होने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच हो तो जिला कार्यक्रम अधिकारी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो डीपीओ के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब से संबंधित अधिकारी एटा में तैनात हुए हैं, तब से आंगनबाड़ी विभाग में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ी हैं। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इस पूरे मामले में किसी प्रकार का राजनीतिक या उच्चस्तरीय संरक्षण तो नहीं मिल रहा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या नहीं।

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