RTI में सचिव का दावा – न प्रस्ताव, न उत्खनन… फिर आखिर गांव से निकला मुरूम गया कहां?

ग्राम पंचायत बाबा मोहतरा में मुरूम खनन पर बड़ा खुलासा! RTI में सचिव का दावा – न प्रस्ताव, न उत्खनन… फिर आखिर गांव से निकला मुरूम गया कहां?

जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू. बेमेतरा जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बाबा मोहतरा में मुरूम खनन को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में ग्राम पंचायत सचिव ने ऐसा जवाब दिया है, जिसने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। ग्रामीणों और आवेदक का आरोप है कि गांव में भारी मात्रा में मुरूम निकाला गया, ट्रैक्टरों से परिवहन हुआ और अलग-अलग लोगों को बेचा भी गया, लेकिन पंचायत अब पूरे मामले से पल्ला झाड़ती नजर आ रही है।

आवेदनकर्ता द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत ग्राम पंचायत बाबा मोहतरा से स्पष्ट जानकारी मांगी गई थी कि ग्राम पंचायत में मुरूम खनन का प्रस्ताव कब पारित हुआ, कितनी मात्रा में मुरूम निकाला गया, कितने ट्रिप मुरूम बाहर गया, किन व्यक्तियों को बेचा गया, बिक्री से कितनी राशि प्राप्त हुई तथा उक्त राशि किस मद में खर्च की गई। साथ ही संबंधित दस्तावेजों की सूचीबद्ध प्रमाणित प्रतियां भी मांगी गई थीं।

लेकिन जन सूचना अधिकारी एवं ग्राम पंचायत सचिव द्वारा दिए गए जवाब में कहा गया कि “ग्राम पंचायत बाबा मोहतरा में वर्तमान में किसी भी प्रकार से मुरूम खनन का प्रस्ताव नहीं लिया गया है और न ही मुरूम उत्खनन का कार्य किया जा रहा है।” सचिव ने यह भी उल्लेख किया कि मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि पंचायत में कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ, कोई उत्खनन नहीं हुआ और कोई बिक्री नहीं हुई, तो ग्रामीणों द्वारा लगातार देखे गए ट्रैक्टरों से मुरूम परिवहन की घटनाएं क्या थीं? ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत क्षेत्र में लंबे समय से मुरूम निकासी का कार्य चलता रहा और प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई।

सूत्रों के अनुसार, गांव में कई स्थानों पर मुरूम खुदाई के निशान आज भी देखे जा सकते हैं। ऐसे में RTI में दिया गया जवाब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यदि वास्तव में कोई खनन नहीं हुआ, तो जमीन पर खुदाई के निशान कैसे मौजूद हैं? और यदि खनन हुआ, तो बिना प्रस्ताव एवं अनुमति के किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चलता रहा?

यह मामला अब केवल पंचायत स्तर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें अवैध खनन, राजस्व हानि और सरकारी रिकॉर्ड छुपाने जैसे गंभीर आरोप जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि पंचायत रिकॉर्ड में कोई प्रस्ताव नहीं है, तो संबंधित विभागों को मौके की जांच कर यह पता लगाना चाहिए कि आखिर मुरूम निकासी किसके आदेश पर हुई और उससे प्राप्त राशि कहां गई।

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि पंचायत के जवाब और जमीनी हकीकत में भारी अंतर दिखाई दे रहा है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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