“गौमाताओं की मौत पर फूटा जनाक्रोश: मंत्री और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की निकलेगी प्रतीकात्मक शवयात्रा”
जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू बेमेतरा/नवागढ़। बेमेतरा जिले में गौमाताओं की लगातार हो रही मौतों को लेकर अब जनआक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। जिला युवा कांग्रेस बेमेतरा एवं गौसेवकों द्वारा जारी एक शोक संदेश ने पूरे जिले की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल मचा दी है। जारी पत्र में छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री, नवागढ़ विधायक एवं पशुपालन विभाग से जुड़े जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रतीकात्मक शवयात्रा निकालने की घोषणा की गई है।
जारी शोक संदेश में कहा गया है कि ग्राम उसलापुर-झिरिया में हुई हृदयविदारक घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। पिछले दो महीनों से लगातार गौमाताओं की मौत हो रही है, लेकिन शासन और प्रशासन के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग मौन साधे हुए हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि गौसेवा और संरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले जिम्मेदार लोग अब संवेदनहीन हो चुके हैं और गौमाताओं को तड़प-तड़प कर मरने के लिए छोड़ दिया गया।
शोक संदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि सैकड़ों गौमाताओं को बिना दाना-पानी के बंद कर देना केवल लापरवाही नहीं बल्कि अमानवीयता की पराकाष्ठा है। जिला युवा कांग्रेस बेमेतरा के जिला महासचिव दीपक सिंह दिनकर एवं आंदोलनकारी साथियों ने लगातार दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई, लेकिन शासन-प्रशासन ने इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी निष्क्रियता और प्रशासनिक विफलता के विरोध में अब आंदोलन का रास्ता चुना गया है।
आयोजकों के अनुसार 09 मई 2026, शनिवार को दोपहर 2 बजे ग्राम झिरिया से प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली जाएगी, जिसका अंतिम संस्कार बेमेतरा के पुराना बस स्टैंड, सिग्नल चौक में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गौसेवकों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक गलियारों में इस आयोजन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दल इसे सरकार की विफलता का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गौशालाओं और पशुओं की स्थिति पर गंभीरता दिखाई जाती, तो आज ऐसी नौबत नहीं आती।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में गौसेवा और गौसंरक्षण हमेशा से संवेदनशील मुद्दा रहा है। ऐसे में गौमाताओं की मौत और उस पर प्रशासनिक चुप्पी ने आम जनता के बीच गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि इस प्रतीकात्मक शवयात्रा के बाद शासन-प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा।
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