मुरुम खनन का रिकॉर्ड गायब! ग्राम पंचायत के जवाब ने खड़े किए बड़े सवाल, RTI से खुल सकता है करोड़ों के खेल का राज

“मुरुम खनन का रिकॉर्ड गायब! ग्राम पंचायत के जवाब ने खड़े किए बड़े सवाल, RTI से खुल सकता है करोड़ों के खेल का राज”

जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू  बेमेतरा:- ग्राम पंचायत जेवरी में मुरुम खनन और उसके विक्रय को लेकर लगाए गए सूचना के अधिकार (RTI) आवेदन ने पंचायत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में ग्राम पंचायत की ओर से दिया गया उत्तर अब विवादों में आ गया है। जवाब में स्पष्ट जानकारी देने के बजाय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने जैसी बातें कही गई हैं, जिससे पूरे मामले में वित्तीय अनियमितता और अवैध मुरुम उत्खनन की आशंका और गहरा गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ताम्रध्वज साहू ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन प्रस्तुत कर पंचायत क्षेत्र में हुए मुरुम खनन से संबंधित दस्तावेज मांगे थे। आवेदन में यह जानकारी चाही गई थी कि पंचायत में मुरुम खनन का प्रस्ताव कब पारित हुआ, कितनी मात्रा में मुरुम निकाली गई, किस व्यक्ति को बेचा गया, कितनी राशि प्राप्त हुई तथा उस राशि को किस मद में खर्च किया गया। साथ ही ट्रैक्टर, हाईवा अथवा अन्य वाहनों से निकाली गई मुरुम की संख्या का प्रमाणित विवरण भी मांगा गया था।

लेकिन पंचायत की ओर से दिए गए जवाब में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय यह कहा गया कि ऐसी जानकारी उपलब्ध नहीं है अथवा आवेदन वापस लेने जैसी बातें लिखी गईं। इस जवाब के सामने आने के बाद पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पंचायत क्षेत्र में मुरुम निकासी हुई है तो उसका प्रस्ताव, लेखा-जोखा, रॉयल्टी और भुगतान रिकॉर्ड पंचायत के पास होना अनिवार्य है। रिकॉर्ड का उपलब्ध नहीं होना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही या गंभीर अनियमितता की ओर संकेत करता है।

RTI कार्यकर्ताओं का कहना है कि पंचायत द्वारा सूचना नहीं देना सूचना के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है। यदि वास्तव में रिकॉर्ड मौजूद नहीं है, तो यह और भी गंभीर मामला बन जाता है क्योंकि बिना रिकॉर्ड के मुरुम उत्खनन अवैध खनन की श्रेणी में आ सकता है। मामले में प्रथम अपील की तैयारी भी शुरू कर दी गई है, जिसमें संबंधित जनसूचना अधिकारी पर धारा 20 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की मांग की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, पंचायत क्षेत्र में लंबे समय से मुरुम परिवहन और निकासी की चर्चा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर कई कार्यों में बिना पारदर्शिता के खनिज संसाधनों का उपयोग किया गया, लेकिन उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। अब RTI आवेदन के बाद यह मामला प्रशासनिक जांच तक पहुंच सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ग्राम पंचायतों में खनिज संसाधनों और विकास कार्यों का वास्तविक लेखा-जोखा कितना पारदर्शी है। यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह मामला बड़े भ्रष्टाचार के खुलासे में बदल सकता है।

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