अलीगंज धर्म परिवर्तन मामला अदालत ने कहा- “समाज में अस्थिरता फैलाने वाला कृत्य”, जमानत याचिका खारिज
संवाददाता धर्मेंद्र चौहान: एटा (अलीगंज): अलीगंज क्षेत्र में धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे चार आरोपियों की जमानत याचिका अपर सत्र न्यायाधीश सारिका गोयल की अदालत ने खारिज कर दी है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे समाज में अस्थिरता फैलाने वाला कृत्य करार दिया और आरोपियों को कोई राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
यह मामला जून माह का है, जब थाना अलीगंज क्षेत्र के किला रोड स्थित एक मकान में पुलिस ने छापा मारा था। इस दौरान वहां महिलाओं और बच्चों समेत कई लोग मौजूद थे, जो कथित तौर पर धर्मांतरण की प्रक्रिया में शामिल पाए गए। आरोप है कि नौकरी और आर्थिक प्रलोभन देकर इन लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था।
इस संबंध में बजरंग दल के सह संयोजक आदित्य ठाकुर की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। मौके से पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया—विजय (पुत्र रामचंद्र, निवासी अकबरपुर कोट), महावीर सिंह (पुत्र विजय सिंह शाक्य, निवासी भरापुरा), सरवन सिंह (पुत्र सुंदरलाल शाक्य, निवासी लुहारी दरवाजा), और धर्मवीर (पुत्र धर्मराज, निवासी गम्हारी, गाजीपुर, जनपद फतेहपुर)।
जमानत के लिए इन आरोपियों की ओर से अदालत में अर्जी दाखिल की गई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि धर्म परिवर्तन की ऐसी घटनाएं समाज की स्थिरता को खतरे में डालती हैं, अतः आरोपियों को फिलहाल किसी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।
प्रशासन की सख्ती और अदालत के इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश गया है कि इस तरह की गतिविधियों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
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