” उड़ान ”
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आओ भरें उड़ान,
छुपे सपनों को ले!
रचें एक नया विहान;
बनें देश के सपूत महान।
बढ़ाएं हिम्मत से हम पग,
बाधारहित बनाएं मग!
बढ़ें मन में ले कर नयी तरंग;
करें हासिल मन में भर उमंग!
विरोधी होवें भले खास अपने,
मेटने को आतुर हों जब सपने!
चलो तुम निर्भय होकर है संग;
जीतो हर मुश्किल भरी है जंग।
साथ छोड़ देवें सब जब अपने,
झेल बाधाए पूरे करो तुम सपने!
मिलेगी मंजिल तुम्हें एक दिन यार;
न करो चिंता तुम कोई भी बेकार।।
– शैलेन्द्र कुमार मिश्र, साहित्यकार
पूर्व प्रधानाचार्य व प्रबंधन सदस्य
‘तुलसी देवी करुणापति स्मारक बालिका इंटर कॉलेज’, तरती, होलागढ़, सोरांव, प्रयागराज, उ०प्र०
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