केडीए में भ्रष्टाचार पर पर्दा, साक्ष्यों के बावजूद कार्यवाही ठप
स्टेट संवाददाता विष्णु रावत कानपुर। कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में भ्रष्टाचार का काला खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। साक्ष्यों के उजागर होने के बावजूद कार्यवाही शून्य बटे सन्नाटा बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, केडीए के उच्च अधिकारी भ्रष्टाचारी और भू माफिया से जुड़े वीसी के पीए कश्यपकांत दुबे पर कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं।
जहां उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग ने भ्रष्टाचार में लिप्त कई पुलिस कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की है, वहीं केडीए विभाग में हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। यहां कश्यपकांत दुबे बेखौफ होकर अब भी कार्यरत है और सरकार व कानून को ठेंगा दिखा रहा है।
वहीं, विभाग ने कई निर्दोष कर्मचारियों पर बिना कारण कार्रवाई कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया, लेकिन जमीनों के बड़े खेल में शामिल कश्यपकांत दुबे को अब तक संरक्षण मिला हुआ है।
कश्यपकांत दुबे पर आरोप है कि उसने शहर के बड़े भू माफियाओं के साथ मिलीभगत कर अवैध जमीनों के कागजों में लीपापोती की है। इतना ही नहीं, जिलाधिकारी के आदेशों की भी खुलेआम अवहेलना करते हुए वह अब भी केडीए में तैनात है।
सूत्र बताते हैं कि केडीए वीसी और सचिव भी इन मामलों में कार्रवाई करने से बच रहे हैं। कारण साफ है – अवैध जमीनों के खेल में इन अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ सकती है।
सवाल यह है कि जब भ्रष्टाचार के साक्ष्य सामने हैं, तो कार्रवाई से किसे और क्यों बचाया जा रहा है?
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