KGMU में फर्जी डॉक्टर का जाल: स्टूडेंट्स को बनाता था निशाना, कई विभागों तक फैले लिंक की जांच तेज
स्टेट ब्यूरो चीफ विष्णु रावत 


King George’s Medical University (KGMU) में पकड़े गए 12वीं पास फर्जी डॉक्टर हस्साम अहमद का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। शुरुआती जांच में सिर्फ फर्जी डिग्री के सहारे इलाज करने की बात सामने आई थी, लेकिन अब यह एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है, जिसकी जड़ें संस्थान के कई विभागों तक फैली बताई जा रही हैं।
स्टूडेंट्स को टारगेट करता था, मरीज कम आते थे
जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हस्साम अहमद के मेडिकल कैंप में मरीजों की संख्या बेहद कम होती थी, जबकि डॉक्टरों और MBBS स्टूडेंट्स की मौजूदगी ज्यादा रहती थी। कैंप को बड़ा और प्रभावशाली दिखाने के लिए वहां दवाइयों और मेडिकल उपकरणों का भंडार रखा जाता था। माना जा रहा है कि इन कैंप्स का असली मकसद मेडिकल स्टूडेंट्स, खासकर फीमेल स्टूडेंट्स को प्रभावित करना था।
NGO के जरिए बढ़ाया नेटवर्क
KGMU प्रशासन के मुताबिक, हस्साम की NGO ‘कार्डियो सेवा’ का को-फाउंडर कैफ अहमद मंसूरी है, जो मुरादाबाद का रहने वाला है। LARI में कोर्स के दौरान उसने निजी क्लीनिकों में काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे लखनऊ के कई डॉक्टरों से संपर्क बना लिया। इसी नेटवर्क के जरिए हस्साम ने अपनी पकड़ मजबूत की।
कई विभागों में पैठ की आशंका
एक पुराने वीडियो में हस्साम अहमद खुद को डॉक्टर की तरह पेश करते हुए टीबी पर जागरूकता फैलाता दिख रहा है। इसके बाद यह आशंका बढ़ गई है कि उसकी पहुंच कार्डियोलॉजी के अलावा रेस्पिरेटरी और पल्मोनरी मेडिसिन विभाग तक भी हो सकती है।बताया जा रहा है कि वह ऐसे वीडियो दिखाकर स्टूडेंट्स को कैंप में बुलाने की कोशिश करता था।
अंदरूनी सहयोग की भी जांच
मामले में एक DM कार्डियोलॉजी डॉक्टर का नाम सामने आने के बाद जांच एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। हालांकि संबंधित डॉक्टर ने साफ किया है कि उनका हस्साम से कोई संबंध नहीं है। फिलहाल जांच टीम कॉल डिटेल्स, सोशल नेटवर्क, पुराने रिकॉर्ड और प्रोफेशनल गतिविधियों की गहराई से पड़ताल कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं किसी अंदरूनी व्यक्ति ने मदद तो नहीं की।
KGMU प्रशासन सख्त
KGMU के डीन डॉ. केके सिंह ने कहा है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। संस्थान से जुड़े सभी संदिग्ध लिंक, रजिस्ट्रेशन और अकादमिक रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है। यह भी जांच हो रही है कि कहीं संस्थान की प्रक्रियाओं में कोई कमी तो नहीं रही, जिसका फायदा उठाकर फर्जी डॉक्टर सक्रिय हो सके।
निष्कर्ष:
हस्साम अहमद का मामला सिर्फ एक फर्जी डॉक्टर तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि यह मेडिकल सिस्टम में संभावित नेटवर्क और सुरक्षा खामियों को उजागर कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच के बाद और बड़े खुलासे हो सकते हैं।












