लोग कहते हैं
तकदीर खुदा बदलता है
मगर
खुदा कहता है
तकदीर मैं बदलता हूं
पर देखता हूं
तू इंसान क्या करता है।
तू इंसान ही
है
जिसने बनाए हैं महल
तू इंसान ही है
जो चढ़ जाता है पर्वत
फिर किस लिए खुद को छोटा
समझता है तू
आयशा अल ग़ज़ल
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