श्रृंगवेरपुर धाम में गंदगी का अंबार, आस्था के बीच फैली अव्यवस्था
संवाददाता प्रयागराज: श्रृंगवेरपुर: प्रयागराज से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित पौराणिक श्रृंगवेरपुर धाम (सिंगरौर), जहां भगवान श्रीराम ने वनगमन के समय निषादराज के सहयोग से गंगा पार की थी, आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
18 जून 2025 को आषाढ़ सप्तमी के अवसर पर यहां स्नान व मेले का आयोजन हुआ और आज अष्टमी के दिन भी श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
जहां एक ओर भक्तगण गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित कर रहे थे, वहीं राम घाट की सीढ़ियों तक फैला कचरा और गंदगी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोल रहा था। श्रद्धालु गंदगी के बीच आस्था की डुबकी लगाने को मजबूर नजर आए।
❝गंगा स्वच्छता के सरकारी दावे ज़मीन पर फेल❞
सरकार द्वारा गंगा को स्वच्छ रखने के तमाम दावों के बावजूद श्रृंगवेरपुर में सफाई का कोई इंतजाम नजर नहीं आया। घाट की सीढ़ियों से लेकर आसपास के क्षेत्र तक कचरे के ढेर दिखाई दिए। न कहीं सफाईकर्मी नजर आए, न ही कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था।
श्रद्धालुओं का कहना है कि हर वर्ष मेलों में यही हाल होता है, लेकिन प्रशासन केवल कागजों पर सक्रिय दिखता है।
स्थानीय प्रशासन बना मूकदर्शक
श्रृंगवेरपुर जैसे ऐतिहासिक स्थल पर इतनी भारी भीड़ के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता और सफाई व्यवस्था का अभाव गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या गंगा स्वच्छता मिशन सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित रह गया है?
क्या धार्मिक स्थलों पर स्वच्छता की जिम्मेदारी कोई नहीं लेना चाहता?
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