एटा में आवारा सांडों का आतंक: आखिर जिम्मेदार कौन?
संवाददाता योगेन्द्र सिंह
एटा। जनपद एटा में आवारा सांडों का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। सड़कों पर खुलेआम घूम रहे सांडों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिससे आमजन और किसानों में भय व आक्रोश व्याप्त है। दिनांक 02/03/2026 को सत्यप्रकाश/हेमराज सिंह निवासी ग्राम उज्जैपुर, एटा अपने घर लौट रहे थे। जैसे ही वह उधमपुर रामनगर पुलिया के पास पहुंचे, अचानक एक आवारा सांड सामने आ गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि उन्हें गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोगों की सहायता से उन्हें उपचार हेतु भेजा गया।
ग्रामीणों का कहना है कि जनपद में गौशालाएं तो बनाई गई हैं, लेकिन आवारा सांडों को वहां व्यवस्थित रूप से नहीं भेजा जा रहा है। सड़कों और खेतों में घूम रहे सांड किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। रात-दिन की मेहनत से उगाई गई फसलें नष्ट हो रही हैं।
किसानों का सवाल है— क्या यह प्रशासन की जिम्मेदारी है या किसान स्वयं इससे निपटें? जब गौशालाएं बनी हैं तो फिर आवारा पशु खुले में क्यों घूम रहे हैं?
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि—
आवारा सांडों को तुरंत पकड़कर गौशालाओं में भेजा जाए।
सड़कों पर विशेष अभियान चलाया जाए।
दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए।
किसानों की फसल नुकसान का सर्वे कर क्षतिपूर्ति दी जाए।
जब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक दुर्घटनाओं और किसानों की परेशानी का सिलसिला जारी रहेगा।
पूछता है किसान — आखिर कब मिलेगी आवारा सांडों से मुक्ति












