छुट्टी के दिन एक रुपए की पर्ची के नाम पर मरीजों से वसूले जा रहे 10 रुपए, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

छुट्टी के दिन एक रुपए की पर्ची के नाम पर मरीजों से वसूले जा रहे 10 रुपए, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

सीएससी अधीक्षक की लापरवाही से हॉस्पिटल के कर्मचारी कर रहे हैं अवैध वसूली

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद अंतर्गत कौड़िहार ब्लॉक स्थित एक सरकारी अस्पताल में अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। यहां के अस्पताल कर्मचारी मरीजों से एक रुपए की सरकारी पर्ची के बदले 10 रुपए वसूल रहे हैं। यह वसूली खासकर छुट्टी के दिनों में की जा रही है, और जब इस पर सवाल किया जाता है तो कर्मचारी साफ तौर पर जवाब देते हैं – “छुट्टी के दिन एक्स्ट्रा चार्ज लगता है।”

स्थानीय निवासियों और मरीजों का कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से यह अवैध वसूली चल रही है लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही से न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि आम जनता का भरोसा भी टूट रहा है।

मरीज बोले – सरकारी अस्पताल से तो उम्मीद ही छोड़ दी है

हॉस्पिटल में इलाज के लिए पहुंचे एक बुजुर्ग मरीज ने बताया, “गरीबी में दो वक्त की रोटी मुश्किल से जुटती है और यहां सरकारी अस्पताल में भी बिना रिश्वत के काम नहीं होता। पर्ची के लिए 10 रुपए दिए, नहीं देते तो पर्ची नहीं मिलती।”

एक महिला मरीज ने बताया कि जब उन्होंने कर्मचारियों से पूछा कि एक रुपए की जगह 10 रुपए क्यों लिए जा रहे हैं, तो जवाब मिला – “आज रविवार है, सरकारी छुट्टी है। एक्स्ट्रा चार्ज लगेगा।”

सीएससी अधीक्षक की भूमिका संदिग्ध  

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल के उच्चाधिकारियों को इस वसूली की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सीएससी अधीक्षक की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यह सब कुछ अधीक्षक की जानकारी में है, लेकिन उनकी चुप्पी ने शक और भी गहरा कर दिया है।

प्रशासन से जांच की मांग  

क्षेत्रीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले में प्रशासन से तत्काल जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी मांग की गई है कि सभी सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और पर्ची, दवा, व अन्य सेवाओं की जानकारी सार्वजनिक स्थान पर स्पष्ट रूप से चस्पा की जाए।

निष्कर्ष

सरकारी अस्पताल आम जनता के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बड़ा आधार होते हैं। यदि इन्हीं संस्थानों में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का बोलबाला रहेगा, तो यह न सिर्फ मरीजों के लिए संकट है बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। शासन-प्रशासन को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि आम जनता का भरोसा बना रहे।

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