एटा में बिजली विभाग के बाबू बेलगाम, डीएम के निर्देशों की अनदेखी

एटा में बिजली विभाग के बाबू बेलगाम, डीएम के निर्देशों की अनदेखी

फरियादी किसान घंटों परेशान, कार्रवाई की उठी मांग

संवाददाता योगेन्द्र सिंह एटा। जनपद एटा में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जलेसर स्थित विद्युत उपखंड कार्यालय में तैनात एसडीओ कार्यालय के बाबू नीरज कुमार की लापरवाही और मनमानी से परेशान किसानों का सब्र जवाब दे गया। बिल संशोधन के लिए पहुंचे किसानों को घंटों इंतजार के बावजूद कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे विभाग के प्रति गहरा आक्रोश देखने को मिला।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कई किसान बीते दो-तीन दिनों से लगातार सुबह करीब 10:00 बजे विद्युत उपखंड कार्यालय पहुंच रहे थे। विभागीय नियमों के अनुसार कार्यालय का समय भी सुबह 10 बजे से ही निर्धारित है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित बाबू करीब 11:20 बजे तक कार्यालय नहीं पहुंचे। इस दौरान कार्यालय के बाहर किसानों की लंबी कतार लगी रही, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी।

किसानों का आरोप है कि जब बाबू कार्यालय पहुंचे तो उन्होंने समस्याओं का समाधान करने के बजाय यह कहकर किसानों को टाल दिया कि “फरवरी माह में ही बिल संशोधन किए जाएंगे”, जबकि मौके पर किसी भी प्रकार का लिखित या ठोस समाधान नहीं दिया गया। इससे नाराज किसानों में भारी रोष फैल गया।

गौरतलब है कि हाल ही में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह ने सभी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जनसमस्याओं के निस्तारण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और फरियादियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान उपलब्ध कराया जाए। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन होता दिखाई दे रहा है।

पीड़ित किसानों का कहना है कि विद्युत विभाग के बाबू पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं और आम जनता को बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर किया जा रहा है। किसानों ने आरोप लगाया कि यदि समय पर बिल संशोधन न हुआ तो उन्हें अनावश्यक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

आक्रोशित किसानों ने संबंधित बाबू को तत्काल हटाने तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं, या फिर ऐसे ही लापरवाह कर्मचारी कार्यालयों में जमे रहेंगे।

पीड़ित किसान गौरव प्रताप सिंह

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