अम्रपाली ग्रुप मनी लॉन्ड्रिंग केस: ED ने 99.26 करोड़ की अचल संपत्तियां की अस्थायी कुर्की
संवाददाता: पवन सूर्यवंशी | प्रवर्तन निदेशालय (ED), लखनऊ जोनल ऑफिस ने अम्रपाली ग्रुप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत 99.26 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।
कुर्क की गई संपत्तियों में मेसर्स मौर्या उद्योग लिमिटेड का ऑफिस तथा फैक्ट्री की जमीन और भवन शामिल हैं। यह कंपनी सुरेका ग्रुप की इकाइयों में से एक है, जिसके प्रमोटर नवनीत सुरेका और अखिल सुरेका हैं। ED के अनुसार 30 दिसंबर 2016 तक इन संपत्तियों का कुल उचित बाजार मूल्य 99.26 करोड़ रुपये आंका गया है।
ED ने यह जांच गौतम बुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश) के विभिन्न थानों और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू की थी। साथ ही, माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 23 जुलाई 2019 को बिक्रम चटर्जी व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य मामले में पारित आदेश के तहत पीड़ित घर खरीदारों की याचिकाओं पर भी जांच आगे बढ़ाई गई।
आरोप है कि अम्रपाली ग्रुप ने घर खरीदारों से बड़ी रकम वसूलने के बावजूद तय समय में फ्लैट्स का कब्जा नहीं दिया और आपराधिक साजिश के तहत फर्जी लेनदेन, जालसाजी और धोखाधड़ी के जरिए खरीदारों के फंड को डायवर्ट और गबन किया।
ED की जांच में सामने आया कि अम्रपाली ग्रुप के डायरेक्टर अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार ने नवनीत सुरेका व अखिल सुरेका के साथ मिलकर TMT बार और निर्माण सामग्री की खरीद के नाम पर गैर-वास्तविक व धोखाधड़ी वाले लेनदेन किए। इन लेनदेन के जरिए घर खरीदारों के फंड को शेल कंपनियों और फर्जी सप्लायरों के जटिल नेटवर्क के माध्यम से लेयर किया गया, बड़ी मात्रा में नकद निकाला गया और खर्च कर दिया गया, जिससे अपराध की आय (POC) उत्पन्न हुई और मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया।
जांच में यह भी स्थापित हुआ है कि 110.39 करोड़ रुपये की राशि मेसर्स मौर्या उद्योग लिमिटेड को डायवर्ट की गई, जो अम्रपाली के घर खरीदारों से जुटाए गए धन से उत्पन्न POC का प्रतिनिधित्व करती है। चूंकि मूल POC समाप्त हो चुके थे और सीधे कुर्की के लिए उपलब्ध नहीं थे, इसलिए ED ने PMLA, 2002 के तहत “वैल्यू के सिद्धांत” पर उक्त अचल संपत्तियों को अटैच किया।
इससे पहले ED ने अम्रपाली ग्रुप के डायरेक्टर अनिल शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार, स्टैच्यूटरी ऑडिटर अनिल मित्तल तथा CFO चंदर प्रकाश वधवा को गिरफ्तार किया था। अब तक इस मामले में छह अभियोजन शिकायतें दायर की जा चुकी हैं, जिनमें 33 व्यक्तियों और संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है।
ED ने PMLA की धारा 5(1) के तहत अब तक कुल छह प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर पारित किए हैं, जिनके तहत 303.08 करोड़ रुपये की कुल मूल्य की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं।
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