जनपद एटा के जलेसर में नकली विकास का खेल: जनता की गाढ़ी कमाई पर फीता काटने का तमाशा
जलेसर. संवाददाता योगेन्द्र सिंह एटा. जलेसर विधानसभा क्षेत्र में विधायक संजीव कुमार दिवाकर का तथाकथित “विकास मॉडल” एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम नोहखेड़ा बम्बा से हाथरस बॉर्डर तक कथित नवनिर्माण खरंजे के शिलान्यास के नाम पर आयोजित कार्यक्रम ने विकास से ज्यादा कैमरा, भीड़ और फोटो सेशन की हकीकत उजागर कर दी।
सूरज ढलते-ढलते फीता काटने का यह आयोजन देखकर साफ लगा कि विधायक महोदय को ज़मीनी काम से ज्यादा दिखावे की राजनीति प्रिय है। यह वही विधायक हैं जो वर्ष 2017 से जलेसर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन आज भी क्षेत्र की सड़कों की हालत बदतर है, बिजली और पानी की समस्याएं जस की तस हैं और युवा रोजगार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस “नवनिर्माण खरंजे” का आज शिलान्यास किया जा रहा है, वह पिछले 8–9 वर्षों से अधर में क्यों लटका रहा? अगर विधायक वास्तव में विकास को लेकर गंभीर थे, तो इसे चुनाव के मुहाने पर ही याद क्यों किया गया? क्या विकास सिर्फ वोट मांगने का जरिया बनकर रह गया है?
कार्यक्रम में जिला मंत्री राम जी लाल राजपूत, मंडल अध्यक्ष आशु ठाकुर सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे। मंच पर मुस्कानें थीं, लेकिन नीचे खड़ी जनता के चेहरों पर निराशा और अविश्वास साफ झलक रहा था। यह आयोजन विकास का नहीं, बल्कि लोकतंत्र के साथ मज़ाक प्रतीत हुआ।
जलेसर को बीते वर्षों में वादों की फैक्ट्री बना दिया गया है—हर साल नया शिलान्यास, नया फीता, लेकिन ज़मीनी हकीकत वही पुरानी। किसान बदहाल हैं, महंगाई बढ़ती जा रही है और बेरोजगारी युवाओं का भविष्य निगल रही है।
अब जनता सब समझ चुकी है। जलेसर को फीता काटने वाले हाथ नहीं, काम करने वाले हाथ चाहिए। अगर यही नाटक चलता रहा, तो आने वाले चुनाव में जनता खुद फैसला करेगी—और इस बार सिर्फ फीता नहीं, बल्कि झूठी राजनीति का अध्याय काट दिया जाएगा।
जलेसर की जनता को चाहिए सच्चा विकास, न कि नकली शिलान्यास और खोखले वादे।
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