ग्राम पंचायत त्रिलोकपुर में मनरेगा घोटाला: बिना कार्य के 34.95 लाख रुपए का भुगतान, ग्रामीणों में रोष
संवाददाता श्याम नंदन शुक्ला सिद्धार्थनगर इटवा: सिद्धार्थनगर जिले के विकासखंड इटवा की ग्राम पंचायत त्रिलोकपुर में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में करोड़ों के फर्जी भुगतान का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिला स्तरीय जांच टीम द्वारा मौके पर की गई जांच में कई अनियमितताएं उजागर हुई हैं। गांववालों ने मामले को “भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण” बताया है।
बिना कार्य के 34.95 लाख रुपए की निकासी
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पंचायत द्वारा 34 लाख 95 हजार रुपये का भुगतान ऐसे कार्यों के नाम पर किया गया है, जो ज़मीनी स्तर पर हुए ही नहीं। कई सड़कों पर कार्य नहीं किया गया, फिर भी भुगतान उठा लिया गया। विशेष रूप से उमर हाजी के खेत से परासी नाला तक 547 मीटर की सड़क पर वर्षों पहले राडा लगाया गया था, लेकिन उस पर भी 2024-25 में फर्जी भुगतान कर लिया गया। आईडी संख्या: 3151002079 /LD/958486255824192717 पर यह फर्जीवाड़ा दर्ज है।
जांच में खुली पोल: घटिया निर्माण और ग़ायब पौधे
जिला कृषि अधिकारी, अपर जिला कृषि अधिकारी और ग्राम सचिव की उपस्थिति में की गई जांच में सामने आया कि कहीं लंबाई कम है, कहीं चौड़ाई में गड़बड़ी है, तो कहीं इंटरलॉकिंग के नीचे गिट्टी तक नहीं डाली गई। ग्राम पंचायत में किए गए वृक्षारोपण कार्यों में भी 2 लाख रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन न तो स्कूलों में, न सार्वजनिक स्थलों पर कोई पौधा मिला और न ही कोई निशान।

पंचायत भवन अधूरा, भुगतान पूरा
पंचायत भवन निर्माण में भी लाखों रुपए खर्च दिखाए गए हैं, लेकिन भवन आज तक अधूरा है। न तो भवन तक कोई रास्ता है और न ही वहां जनता को सुविधा मिल रही है।
केयरटेकर को नहीं मिला मेहनताना, भुगतान रिकॉर्ड में दर्ज
ग्राम पंचायत के सामुदायिक शौचालय की केयरटेकर चंद्रामती ने जांच अधिकारियों के समक्ष बताया कि वह कई महीनों से कार्य कर रही हैं, लेकिन आज तक उन्हें एक भी रुपया नहीं मिला। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पास खाने तक के लिए कुछ नहीं है। वहीं सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी में बताया गया कि उन्हें करीब 2 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया है।
84 मजदूरों की फर्जी हाजिरी, केवल 20 ने किया कार्य
गांव वालों ने बताया कि मनरेगा में केवल 20 लोग काम करते हैं, लेकिन हाजिरी में 84 मजदूरों का नाम दर्ज कर भुगतान कर दिया जाता है। रोजगार सेवक और सचिव की मिलीभगत से पूरे गांव में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो गई हैं।
निर्माण समिति अध्यक्ष की अनदेखी
निर्माण समिति के अध्यक्ष केशव ने भी इस बात की पुष्टि की कि पांच वर्षों में न तो उनसे कोई राय ली गई और न ही किसी कागज पर हस्ताक्षर करवाया गया। उनके फर्जी हस्ताक्षर करके सभी फाइलें तैयार की जाती हैं।
ग्रामीणों की मुख्यमंत्री से मांग: हो विशेष जांच
गांव के लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि इस घोटाले की विशेष जांच टीम गठित कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यह भ्रष्टाचार अपने आप में पूरे प्रदेश में एक बड़ा उदाहरण है।
ये भी पढ़ें साक्षी चौहान ने कक्षा 12 वीं में 86% अंक लाकर क्षेत्र को किया गौरान्वित













