संत रविदास जयंती पर परिचर्चा।उन्हें भक्ति युग का सबसे बड़ा समतावादी प्रवक्ता बताया

संत रविदास जयंती पर परिचर्चा।उन्हें भक्ति युग का सबसे बड़ा समतावादी प्रवक्ता बताया

संवाददाता पवन सूर्यवंशी फर्रुखाबाद

फर्रुखाबाद/कायमगंज मानवतावादी संत रविदास की जयंती पर साहित्यिक संस्था साधना निकुंज एवं अनुगूंज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में साहित्यकारों ने उन्हें भक्ति युग का सबसे बड़ा समतावादी प्रवक्ता बताया । अध्यक्ष प्रोफेसर रामबाबू मिश्र “रत्नेश” ने कहा कि सतगुरु मानते थे कि सामाजिक समता का एकमात्र रास्ता भक्ति और कर्म योग का संगम है। मन चंगा होने पर चमड़ा भिगोने की कठौती में भी गंगा का अवतरण संभव है। जीव और परमात्मा के बीच चंदन और पानी जैसा संबंध होने पर मानव का हृदय सुवासित हो जाता है। गीतकार पवन बाथम ने कहा कि हिंदी साहित्य के इतिहास में भक्ति कालीन कविता मानव एकात्म वाद और सामाजिक समरसता की प्रेरणा देती है‌। संतों ने बेखौफ होकर सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार किया और सही मार्ग दिखाया। हंसा मिश्रा ने कहा कि संत रविदास अपने युग की वैचारिक क्रांति के अगुआ थे। उन्होंने पाखंड रहित विवेकपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा दी‌‌‌‌‌‌‍। अनुपम मिश्रा ने कहा कि संत रविदास का संदेश है कि सामाजिक समरसता राजनीतिक दबाव और वर्ग संघर्ष से संभव नहीं है। इसके लिए मन की पवित्रता, भक्ति एवं कर्म के प्रति निष्ठा, आपसी सद्भाव जरूरी है। डॉक्टर सुनीत सिद्धार्थ ने कहा की संत रविदास युगांतरकारी संत थे।आज हमें ऐसे संतों की बहुत जरूरत है । छात्र कवि यशवर्धन ने कहा सेवा हो सद्भाव हो मन मे विमल प्रकाश समरसता का मंत्र दे रहे हमें रविदास।गोष्ठी में अहिवरन सिंह गौर,शिवकांत शुक्ला,विवेक बाथम,शिवकुमार दुबे आदि ने भी विचार रखे।

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