पोर्टल ठप, सरकारी रेट पर नहीं बिक रही मक्का; किसान घाटे में बेचने को मजबूर

पोर्टल ठप, सरकारी रेट पर नहीं बिक रही मक्का; किसान घाटे में बेचने को मजबूर

संवादाता अमन अहमद: एटा। किसानों को मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने का सरकार का दावा इस बार भी अधूरा नजर आ रहा है। सरकार ने मक्का के लिए ₹2225 प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य तय किया है और जिले में सात सरकारी खरीद केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि पोर्टल पर पंजीकरण ही नहीं हो पा रहा है।

पोर्टल ठप होने के कारण किसान अपनी उपज सरकारी केंद्रों पर नहीं बेच पा रहे और मजबूरी में मक्का को ₹1900 से ₹2000 प्रति क्विंटल के बीच के भाव में मंडी में आढ़तियों को बेच रहे हैं — यानी लगभग ₹225 से ₹325 प्रति क्विंटल का घाटा झेलना पड़ रहा है।

मंडी में इन दिनों मक्का की आवक रिकॉर्ड स्तर पर है। मंडी सचिव कपिल कुमार गुप्ता के अनुसार, जून 2024 में मक्का की कुल खरीद 2.52 लाख क्विंटल रही थी, लेकिन इस बार जून खत्म होने से पहले ही 2.55 लाख क्विंटल मक्का की बिक्री हो चुकी है।

स्थानीय आढ़ती झब्बू गुप्ता का कहना है कि मक्का की बंपर फसल के चलते किसान अब उपज घर में नहीं रोक रहे। बारिश का खतरा बना हुआ है और भीगने से मक्का की गुणवत्ता गिर रही है। ऐसे में किसान कम रेट में भी मक्का बेचने को मजबूर हैं। मंडी में भीगी और दागी मक्का ₹1900–₹1940 में बिक रही है, जबकि अच्छी मक्का का अधिकतम भाव ₹2000 तक है।

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