लखनऊ में मेयर के समर्थन में उग्र प्रदर्शन: बैरिकेडिंग तोड़ी, पुलिस से झड़प; बयानबाजी से बढ़ा सियासी घमासान
स्टेट ब्यूरो चीफ विष्णु रावत 


लखनऊ में शनिवार को उत्तराखंड मूल के लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी सुषमा खर्कवाल के समर्थन में सड़कों पर उतरे और हजरतगंज क्षेत्र में नारेबाजी की। जीपीओ स्थित गांधी प्रतिमा के पास जुटे लोगों ने अखिलेश यादव के खिलाफ नारे लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने जब उन्हें रोकने का प्रयास किया तो प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग गिराकर आगे बढ़ गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे हजरतगंज में कुछ समय के लिए जाम जैसी स्थिति बन गई। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पर्वतीय समाज के लोग और पूर्व सैनिक शामिल थे, जो ‘नारी शक्ति के अपमान’ के विरोध में आवाज उठा रहे थे।
बयान से भड़का विवाद
यह पूरा विवाद महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा की जनाक्रोश रैली के दौरान मेयर सुषमा खर्कवाल के बयान से शुरू हुआ। उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर खुली चिट्ठी लिखी और कड़ी आपत्ति जताई।
मेयर का जवाब
मेयर सुषमा खर्कवाल ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा, “मैं किसी की मां को गाली क्यों दूंगी? अगर कहीं साबित हो जाए तो बताएं। मैंने सिर्फ महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात की है।” उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और आरक्षण की मांग धर्म के आधार पर नहीं बल्कि समान अधिकारों के आधार पर होनी चाहिए।
क्या कहा था मेयर ने?
जनाक्रोश रैली में मेयर ने कहा था कि भारत में सदियों से महिलाओं का सम्मान होता आया है, लेकिन विपक्ष ने महिलाओं का अपमान किया है। उन्होंने नेताओं को संबोधित करते हुए ‘मां, बहन और बेटी के सम्मान’ का मुद्दा उठाया था, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
बढ़ती सियासत, सड़क पर असर
इस पूरे घटनाक्रम ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। एक ओर बयानबाजी तेज हो गई है, तो दूसरी ओर सड़कों पर प्रदर्शन और विरोध देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।












