“RTI मांग पत्र या मजाक? ग्राम पंचायत करचुवा में बिना क्रमांक, बिना पृष्ठ संख्या के थमाया गया 660 रुपये का नोटिस
जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू
बेमेतरा। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नागरिकों को जानकारी प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है, लेकिन बेमेतरा जिले के ग्राम पंचायत करचुवा से सामने आया मामला पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहां ग्राम पंचायत सचिव द्वारा RTI आवेदन के जवाब में 660 रुपये की मांग पत्र भेजी गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उस पत्र में न तो पृष्ठ संख्या का उल्लेख है, न कोई कार्यालय क्रमांक, (मांग पत्र )न सरपंच का नाम और मोबाइल नंबर, और न ही ग्राम पंचायत सचिव का नाम, पदनाम अथवा संपर्क नंबर दर्ज है। मिली जानकारी के अनुसार आवेदक ने ग्राम पंचायत से विभिन्न दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपियां मांगी थीं। इसके जवाब में पंचायत की ओर से एक साधारण मांग पत्र भेजा गया, जिसमें केवल इतना लिखा गया कि “आवश्यक राशि का उपयोग कर शेष राशि आपको मूलतः वापस किया जाएगा।” लेकिन यह नहीं बताया गया कि आखिर 660 रुपये किस आधार पर मांगे जा रहे हैं, कितने पृष्ठों की कॉपी दी जाएगी और प्रति पृष्ठ कितना शुल्क निर्धारित किया गया है। सबसे गंभीर बात यह मानी जा रही है कि मांग पत्र में किसी प्रकार का कार्यालयीन क्रमांक या जारी करने वाले अधिकारी की स्पष्ट पहचान तक नहीं है। सामान्य प्रशासनिक नियमों के अनुसार किसी भी शासकीय पत्र में क्रमांक, दिनांक, अधिकारी का नाम, पदनाम एवं हस्ताक्षर होना आवश्यक माना जाता है। लेकिन यहां भेजे गए पत्र में ऐसी मूलभूत जानकारियों का अभाव दिखाई दे रहा है। RTI कार्यकर्ताओं और जानकारों का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत यदि किसी आवेदक से अतिरिक्त शुल्क मांगा जाता है तो विभाग को स्पष्ट रूप से यह बताना होता है कि कुल कितने पृष्ठ हैं, प्रति पृष्ठ शुल्क कितना है और कुल राशि कैसे निर्धारित की गई। बिना विवरण के सीधे बड़ी राशि मांगना अधिनियम की भावना के विपरीत माना जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस प्रकार के अधूरे और अस्पष्ट मांग पत्र नागरिकों को भ्रमित करने तथा सूचना प्राप्ति की प्रक्रिया को जटिल बनाने का माध्यम बनते जा रहे हैं। कई लोगों ने इसे “अवैध वसूली जैसी कार्यप्रणाली” बताते हुए मामले की जांच की मांग की है। सूत्रों के अनुसार अब इस मामले में प्रथम अपील और उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजने की तैयारी की जा रही है। RTI जानकारों का कहना है कि यदि किसी विभाग द्वारा नियम विरुद्ध या अस्पष्ट मांग पत्र जारी किया जाता है तो आवेदक सूचना आयोग तक जाकर कार्रवाई की मांग कर सकता है। ग्राम पंचायत करचुवा का यह मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि जब सूचना देने वाला कार्यालय ही नियमों का पालन नहीं करेगा, तो पारदर्शिता और सुशासन की बात केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और क्या आवेदक को नियम अनुसार स्पष्ट एवं वैध जानकारी उपलब्ध कराई जाती है या नहीं।












