डेहरी-ऑन-सोन में इमारत-ए-शरिया का ऐतिहासिक महासम्मेलन संपन्न
डेहरी से संवाददाता सैयद नफीस करीम की रिपोर्ट।
डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास): स्थानीय जक्की बिगहा स्थित इंजीनियर ललन सिंह स्पोर्ट्स क्लब के मैदान में आज इमारत-ए-शरिया बिहार, ओडिशा व झारखंड के अमीर-ए-शरियत, हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी साहब की उपस्थिति में एक विशाल ‘खुसूसी तरबियती इजलास’ का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के हजारों लोगों सहित देश के नामचीन उलेमाओं ने शिरकत की। दीनी व दुनियावी तालीम पर जोर: सम्मेलन को संबोधित करते हुए हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने कहा कि वर्तमान समय में मुसलमानों के लिए दीनी (धार्मिक) ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक और तकनीकी शिक्षा हासिल करना अनिवार्य है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा ही वह हथियार है जिससे समाज की तकदीर बदली जा सकती है। दोहरी शिक्षा नीति पर बल: हजरत मौलाना ने अपने संबोधन में साफ तौर पर कहा कि आज के दौर में दीनी तालीम (धार्मिक शिक्षा) के साथ-साथ आधुनिक तालीम (Modern Education) का संगम जरूरी है। उन्होंने कहा कि बिना शिक्षा के कोई भी समाज तरक्की नहीं कर सकता। नस्लों की तरबियत: मौलाना रहमानी ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि केवल डिग्री हासिल करना काफी नहीं है, बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण (तरबियत) पर ध्यान देना अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने भीतर नैतिकता और जिम्मेदारी पैदा करें। इमारत-ए-शरिया का मिशन: कार्यक्रम में इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे इमारत-ए-शरिया समाज के कमजोर वर्गों की मदद और उनके शैक्षिक उत्थान के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उलेमाओं का जमावड़ा: इस मौके पर देश के कई प्रतिष्ठित उलेमा-ए-किराम मौजूद रहे, जिन्होंने समाज में एकता, शांति और भाईचारे का संदेश दिया। तरबियत (प्रशिक्षण) की अहमियत: उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों की केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि उनके नैतिक चरित्र और ‘तरबियत’ पर भी विशेष ध्यान दें, ताकि वे देश के जिम्मेदार नागरिक बन सकें। एकजुटता का संदेश: इस ऐतिहासिक सभा में उलेमा-ए-किराम ने सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया। यह महासम्मेलन डेहरी के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ, जहाँ इंजीनियर ललन सिंह स्पोर्ट्स क्लब का विशाल प्रांगण जनसमूह से खचाखच भरा रहा। स्थानीय आयोजन समिति ने अतिथियों और दूर-दराज से आए लोगों के लिए व्यापक इंतजाम किए थे।
“दीन और दुनिया की कामयाबी का रास्ता कलम और किताब से होकर गुजरता है। हमें अपने बच्चों को शिक्षित और अनुशासित बनाकर समाज की मुख्यधारा में आगे लाना होगा।”












