खैरपुरा की रीता बनीं बदलाव की मिसाल, 250 महिलाओं को दिलाया रोजगार
संवाददाता पुष्पेंद्र कुमार
एटा के अलीगंज विकास खंड क्षेत्र में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम लगातार नई सफलता की कहानियां गढ़ रही है। इसी क्रम में खैरपुरा गांव की रीता आज क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से न सिर्फ अपनी जिंदगी बदली, बल्कि 250 से अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया।
रीता ने बताया कि एक समय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। इसी दौरान उन्होंने वैष्णवी स्वयं सहायता समूह का गठन किया और 11 महिलाओं को साथ लेकर स्वरोजगार की दिशा में काम शुरू किया। उनका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना था।
समूह से जुड़ी महिलाओं ने पशुपालन, कृषि कार्य, सिलाई-कढ़ाई और अन्य छोटे व्यवसायों को अपनाया। इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ी और परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया। बेहतर कार्य और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए रीता का चयन समूह सखी के पद पर किया गया।
वर्तमान में रीता के मार्गदर्शन में महिलाएं भैंस और गाय पालन, बकरी पालन, ई-रिक्शा संचालन, किराना दुकान, सिलाई सेंटर और सब्जी उत्पादन जैसे कार्यों से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। कई महिलाओं की वार्षिक आय तीन से चार लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
रीता ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों को सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिला और वे आत्मनिर्भर बन सकीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय खंड विकास अधिकारी शिव शंकर शर्मा, एडीओ आईएसबी शिव प्रताप और ब्लॉक मिशन प्रबंधक गंगाधर को दिया।
खंड विकास अधिकारी शिव शंकर शर्मा ने कहा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन रहे हैं। सरकार की योजनाओं के जरिए ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भरता प्रदान की जा रही है।
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