अव्यवस्थाओं की चपेट में स्वास्थ्य सेवाएं: वीरांगना अवंतीबाई लोधी मेडिकल कॉलेज एटा

अव्यवस्थाओं की चपेट में स्वास्थ्य सेवाएं: वीरांगना अवंतीबाई लोधी मेडिकल कॉलेज एटा

जिला संवाददाता: काव्यांश रावत. एटा। जनपद एटा व कासगंज के लोगों के लिए वीरांगना अवंतीबाई लोधी मेडिकल कॉलेज एक वरदान बनकर सामने आया है। यहाँ गरीब, मध्यम और उच्च वर्ग के हजारों मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। डॉक्टरों की सेवाएं, दवाएं और उपचार की गुणवत्ता सराहनीय है, यही कारण है कि अस्पताल में मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।

लेकिन मरीजों को इलाज से पहले जूझना पड़ रहा है अव्यवस्था से।

सुरक्षा व्यवस्था लचर, गार्ड निष्क्रिय

अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्डों की भूमिका सवालों के घेरे में है। गार्ड अक्सर गेट पर आराम फरमाते नजर आते हैं और मरीजों को कतार में लगाने या अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी से दूर रहते हैं। कई बार देखा गया है कि गार्ड अपने परिचितों को लाइन से हटाकर सीधे पर्चा बनवाने में मदद करते हैं।

पर्चा काउंटर से लेकर डॉक्टर के कक्ष तक अराजकता

पर्चा बनवाने के लिए लगी लाइनों में अव्यवस्था आम बात हो गई है। मरीज जब घंटों इंतजार करते हैं, उसी समय कुछ लोग बिना कतार सीधे काउंटर तक पहुंच जाते हैं। यही स्थिति डॉक्टर कक्ष के बाहर भी देखने को मिलती है, जहाँ रसूखदार या स्टाफ से जुड़े लोग बिना लाइन के इलाज करवा लेते हैं।

दवा वितरण में भी भारी गड़बड़ी

दवा वितरण काउंटर पर भी अव्यवस्था का बोलबाला है। वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं, दिव्यांगों और पत्रकारों के लिए अलग काउंटर बनाया गया है, जो सराहनीय है। लेकिन इसी विशेष काउंटर पर सबसे ज्यादा धांधली सामने आ रही है। मेडिकल स्टाफ या उनके परिचित बिना लाइन के दवा प्राप्त कर लेते हैं, जबकि जिनके लिए यह काउंटर बना है, उन्हें भी सामान्य कतार में लगना पड़ता है।

समाधान की दिशा में क्या हो कदम?

  • यदि मेडिकल कॉलेज प्रशासन इन समस्याओं को गंभीरता से ले तो व्यवस्थाओं में बड़ा सुधार संभव है। इसके लिए आवश्यक कदम निम्न हो सकते हैं:
  • टोकन प्रणाली लागू की जाए ताकि भीड़ को व्यवस्थित किया जा सके।
  • सुरक्षा गार्डों की जिम्मेदारी स्पष्ट की जाए और उन पर निगरानी रखी जाए।
  •  दवा वितरण में पारदर्शिता लाई जाए और स्टाफ को मिलने वाली दवा के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।
  • लाइन तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

निष्कर्ष

डॉक्टरों की सेवा, उपचार और दवाएं बेशक गुणवत्तापूर्ण हैं, लेकिन अव्यवस्था के चलते मरीजों को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है। यदि प्रशासन व्यवस्था को दुरुस्त कर दे तो यह मेडिकल कॉलेज प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ स्वास्थ्य संस्थानों में गिना जा सकता है। जनता का भरोसा तभी कायम रहेगा, जब अस्पताल की व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत और संवेदनशील होगी जितनी कि उसकी चिकित्सा सेवाएं।

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