आरटीआई दबाने का खेल बेनकाब : आवेदन गायब, अपील खारिज और अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल”

आरटीआई दबाने का खेल बेनकाब : आवेदन गायब, अपील खारिज और अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल”

स्पीड पोस्ट से भेजे गए आवेदन को ‘प्राप्त नहीं’ बताकर बचने की कोशिश, प्रथम अपील में भी नहीं मिली राहत — कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ से निष्पक्ष जांच और दंडात्मक कार्रवाई की मांग

जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू बेमेतरा। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की व्यवस्था पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब ग्राम पंचायत हरदास एवं तिरियाभाठ में सूचना मांगने वाले आवेदक को समयसीमा के भीतर जानकारी देने के बजाय आवेदन प्राप्ति से ही इंकार किए जाने और प्रथम अपील को कथित रूप से बिना निष्पक्ष जांच के निरस्त किए जाने का मामला सामने आया।

आवेदक ने जिला कलेक्टर बेमेतरा एवं जिला पंचायत सीईओ को विस्तृत शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत हरदास में 15वें वित्त से संबंधित कैशबुक, प्रस्ताव रजिस्टर, बिल-वाउचर एवं अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई थी, लेकिन जन सूचना अधिकारी द्वारा जानबूझकर सूचना रोकी गई।

शिकायत में उल्लेख किया गया है कि आवेदन 30 मार्च 2026 को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा गया था, किंतु बाद में जारी पत्र में आवेदन प्राप्ति दिनांक 30 अप्रैल 2026 दर्शाई गई। आवेदक का आरोप है कि यह समयसीमा से बचने और अधिनियम की वैधानिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है।

वहीं ग्राम पंचायत तिरियाभाठ के मामले में भी जन सूचना अधिकारी द्वारा आवेदन प्राप्त होने से ही इंकार कर दिया गया, जबकि आवेदक के पास स्पीड पोस्ट प्रेषण का प्रमाण मौजूद है। आरोप है कि प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा उपलब्ध डाक प्रमाणों की गंभीरता से जांच किए बिना ही अपील खारिज कर दी गई तथा पुनः आवेदन देने की सलाह दे दी गई।

मामले को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि जब पत्रकार द्वारा प्रथम अपीलीय अधिकारी से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कैमरे पर बयान देने से इंकार कर दिया। इससे पूरे घटनाक्रम में प्रशासनिक पारदर्शिता पर और अधिक सवाल खड़े हो रहे हैं।

आवेदक ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए तथा ग्राम पंचायतों के वित्तीय अभिलेखों की विशेष जांच कराई जाए।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और आरटीआई व्यवस्था में पारदर्शिता बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं‌।

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