15वें वित्त आयोग की फाइलों पर पर्दा?

15वें वित्त आयोग की फाइलों पर पर्दा?

RTI को ‘अस्पष्ट’ बताकर रोकी गई जानकारी, अब राज्य सूचना आयोग पहुंचा मामला

ग्राम पंचायत कुम्ही (भि.) में वित्तीय अभिलेखों को लेकर बड़ा विवाद, पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल

 जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू बेमेतरा।:- ग्राम पंचायत कुम्ही (भि.), जनपद पंचायत बेरला में 15वें वित्त आयोग से संबंधित वित्तीय अभिलेखों की जानकारी मांगने पर सूचना नहीं दिए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी को “अस्पष्ट एवं व्यापक” बताकर रोक दिए जाने के बाद शिकायतकर्ता ने पहले प्रथम अपील दायर की और अब सीधे छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग, नवा रायपुर का दरवाजा खटखटा दिया है।

कैशबुक, बिल-वाउचर और प्रस्ताव रजिस्टर की मांगी गई थी जानकारी

आवेदक द्वारा 15वें वित्त आयोग के तहत खर्च हुए सार्वजनिक धन से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं। इनमें प्रस्ताव रजिस्टर, कैशबुक, ऑनलाइन कैशबुक, बिल एवं वाउचर सहित अन्य वित्तीय अभिलेख शामिल थे। आवेदन में स्पष्ट रूप से 01 जनवरी 2025 से आवेदन तिथि तक की अवधि अंकित की गई थी।

“अस्पष्ट आवेदन” बताकर सूचना देने से इनकार

शिकायत के अनुसार जन सूचना अधिकारी ने सूचना उपलब्ध कराने के बजाय आवेदन को “अस्पष्ट एवं व्यापक” करार देते हुए केवल अभिलेख निरीक्षण (Inspection) का सुझाव दिया। इस कार्रवाई को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि जब आवेदन एक ही योजना — “15वें वित्त आयोग” — से संबंधित था, तब उसे अस्पष्ट कैसे माना गया?

Inspection सूचना का विकल्प नहीं” — अपील में बड़ा तर्क

प्रथम अपील एवं राज्य सूचना आयोग में प्रस्तुत शिकायत में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अभिलेख निरीक्षण केवल एक सहायक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इससे प्रमाणित प्रतियां देने की कानूनी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्पष्ट सूचना को तकनीकी आधार पर टालने का प्रयास किया गया।

सार्वजनिक धन की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल

मामला सार्वजनिक धन के उपयोग और पंचायत स्तर पर वित्तीय जवाबदेही से जुड़ा होने के कारण अब यह मुद्दा प्रशासनिक पारदर्शिता का बड़ा विषय बनता जा रहा है। शिकायत में कहा गया है कि सूचना रोका जाना RTI अधिनियम की मूल भावना — पारदर्शिता और जवाबदेही — के विपरीत प्रतीत होता है।

राज्य सूचना आयोग से जांच और कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता ने राज्य सूचना आयोग से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर संबंधित जन सूचना अधिकारी को नियमानुसार सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएं तथा आवश्यक वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता पर फिर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने पंचायत स्तर पर वित्तीय अभिलेखों की उपलब्धता, सूचना अधिकार कानून के पालन और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर राज्य सूचना आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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