“धूप में जनता परेशान, जिम्मेदार नदारद — आखिर किसके लिए है सुशासन तिहार?”
समस्या लेकर पहुंचे फौजी का फूटा गुस्सा, बोले— अधिकारी नहीं तो सुशासन किस बात का?
जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू
बेमेतरा- प्रदेश सरकार द्वारा जनता की समस्याओं के समाधान के लिए चलाए जा रहे “सुशासन तिहार” को लेकर बेमेतरा जिले में गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। एक ओर क्षेत्रीय विधायक दीपेश साहू अपने वैवाहिक कार्यक्रमों में व्यस्त बताए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारी भी जनता की समस्याएं सुनने के बजाय अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त नजर आए। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। बीते 29 मई 2026 को बेमेतरा नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 18 भद्रकाली वार्ड में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरे अभियान की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। अपनी समस्या लेकर पहुंचे पूर्व सैनिक सूर्य सिंह चौहान उस समय नाराज हो गए जब उन्हें पता चला कि उनकी शिकायत से संबंधित अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चौहान ने कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों से पूछा कि उनके आवेदन से संबंधित एसडीएम और तहसीलदार क्यों नहीं आए हैं। जवाब मिला कि संबंधित अधिकारी विधायक के विवाह समारोह एवं मुख्यमंत्री कार्यकर्ता में व्यस्त हैं। यह सुनकर चौहान ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदार अधिकारी ही मौजूद नहीं हैं तो फिर ऐसे आयोजन का औचित्य क्या है।
उन्होंने शिकायत पेटी में आवेदन डालने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को यह भरोसा कैसे होगा कि उनकी शिकायत वास्तव में दर्ज हुई है और उसका निराकरण होगा। मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष विजय सिन्हा के पहुंचने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। इस घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय यह बन गया है कि क्या सुशासन तिहार वास्तव में जनसमस्याओं के समाधान का मंच है या फिर केवल औपचारिकता निभाने का माध्यम। भीषण गर्मी में अपनी समस्याएं लेकर पहुंची जनता को जब जिम्मेदार अधिकारी ही उपलब्ध नहीं मिले तो प्रशासन के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जिला प्रशासन लगातार दावा करता रहा है कि सुशासन तिहार के माध्यम से प्रत्येक नागरिक की समस्या सुनी जाएगी और उसका समयबद्ध निराकरण किया जाएगा। लेकिन भद्रकाली वार्ड की यह घटना उन दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
अब जनता पूछ रही है कि यदि जनप्रतिनिधि और अधिकारी सुशासन तिहार में उपस्थित नहीं रहेंगे तो आम नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद किससे करे? सुशासन तिहार का उद्देश्य जनविश्वास बढ़ाना था, लेकिन ऐसे घटनाक्रम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
बड़ा सवाल
क्या सुशासन तिहार जनता की समस्याओं के समाधान का मंच है या फिर सरकारी प्रचार का एक और कार्यक्रम?
जब जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे और शिकायतकर्ता की समस्या का समाधान नहीं हो सका, तब यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि आखिर जनता को सुशासन का वास्तविक लाभ कब मिलेगा।












