एटा: तीन महीने से वेतन अटका, पांच महीने से प्रोत्साहन राशि लंबित

तीन महीने से वेतन अटका, पांच महीने से प्रोत्साहन राशि लंबित: एटा में सीएचओ ने फील्ड वर्क का किया बहिष्कार।

संवाददाता अमन अहमद। एटा जनपद में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) ने मानदेय और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि (पीबीपी) के भुगतान में हो रही देरी के विरोध में फील्ड वर्क का बहिष्कार शुरू कर दिया है। सोमवार को यूपी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के बैनर तले अलीगंज ब्लॉक के सीएचओ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां उन्होंने अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर लंबित भुगतान जल्द जारी कराने की मांग की।

संघ के जिला महामंत्री विकास राजावत ने बताया कि जिले के सीएचओ को पिछले तीन महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जबकि प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि भी पिछले पांच माह से लंबित है। इसके अलावा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से जुड़ी कई योजनाओं और गतिविधियों की धनराशि समय से जारी नहीं होने के कारण कर्मचारियों के सामने आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। उनका कहना है कि लगातार वेतन न मिलने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है और बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च तथा दैनिक जरूरतों को पूरा करने में दिक्कत आ रही है।

सीएचओ संघ ने आरोप लगाया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराने के बावजूद समाधान नहीं निकला। इसी के चलते जिले के विभिन्न ब्लॉकों में स्वास्थ्य अधिकारियों ने अपने-अपने स्तर पर विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है। अलीगंज ब्लॉक में भी सीएचओ ने एकजुट होकर भुगतान में देरी पर नाराजगी जाहिर की।

हालांकि, सीएचओ ने स्पष्ट किया है कि वे पूरी तरह काम बंद नहीं कर रहे हैं। स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों और उपकेंद्रों पर उनकी उपस्थिति बनी रहेगी। ऑनलाइन कार्य, पोर्टल अपडेट, रिपोर्टिंग और विभागीय जरूरी काम जारी रखे जाएंगे, लेकिन घर-घर सर्वे, फील्ड विजिट, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और सामुदायिक गतिविधियों में भाग नहीं लिया जाएगा।

इस मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मानदेय जारी करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और संबंधित फाइल ट्रेजरी को भेज दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही कर्मचारियों का भुगतान कर दिया जाएगा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बहिष्कार लंबा चला तो ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। गर्भवती महिलाओं की निगरानी, गैर संचारी रोगों का सर्वे, टीकाकरण फॉलोअप और स्वास्थ्य जागरूकता जैसी योजनाएं प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

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