सौंदर्यकरण की आड़ में मुरूम खनन का खेल! ग्राम पंचायत देवरी में ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई गुहार
गोठान की संरक्षित भूमि और रोजगार गारंटी योजना क्षेत्र में मनमानी खुदाई का आरोप, सरपंच-पंचों की भूमिका पर उठे सवाल
जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू
बेमेतरा। ग्राम पंचायत देवरी में सौंदर्यकरण कार्य के नाम पर कथित रूप से अवैध मुरूम खनन एवं परिवहन किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में ग्रामवासियों ने जिला कलेक्टर बेमेतरा को आवेदन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप एवं जांच की मांग की है।ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत क्षेत्र के गोठान जैसे संरक्षित स्थल में मुरूम की खुदाई की जा रही है। इतना ही नहीं, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत विकसित भूमि एवं कार्यस्थलों को भी नहीं बख्शा गया और वहां भी मनमाने ढंग से खुदाई कर मुरूम का आहरण किया जा रहा है।आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पंचायत के कुछ जिम्मेदार प्रतिनिधियों द्वारा ग्रामीणों की आपत्तियों को नजरअंदाज कर कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के विकास एवं सार्वजनिक हित को दरकिनार करते हुए व्यक्तिगत स्वार्थ को प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके कारण कई बार गांव के लोगों के साथ विवाद एवं बहसबाजी की स्थिति भी निर्मित हुई है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सौंदर्यकरण कार्यों की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए, गोठान एवं मनरेगा भूमि पर हुई खुदाई का सत्यापन किया जाए तथा यदि अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की संपत्ति एवं सार्वजनिक संसाधनों का संरक्षण प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में गांव की शासकीय भूमि को गंभीर क्षति पहुंच सकती है। आवेदन पर योगेश साहू, तारकेश्वर साहू सहित ग्राम पंचायत देवरी के समस्त ग्रामवासियों ने हस्ताक्षर कर प्रशासन से निष्पक्ष जांच एवं न्यायोचित कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
गोठान एवं अन्य संरक्षित स्थलों पर हुई खुदाई की जांच की जाए।मनरेगा कार्यस्थल पर मुरूम आहरण की सत्यता की जांच हो। मुरूम के परिवहन एवं उपयोग से संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया जाए। जांच पूर्ण होने तक संबंधित कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जाए। दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। “गांव की शासकीय संपत्ति की रक्षा और विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने इसी उम्मीद के साथ जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है।”












