मुरूम माफियाओं पर मेहरबानी या सिस्टम की चुप्पी? परिवहन अनुमति की आड़ में जेसीबी से खुदाई, करोड़ों के अवैध खनन पर उठे सवाल
जेवरी से भोइनाभाठा तक मुरूम का खेल! शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है अवैध खनन?
जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू
बेमेतरा। बेमेतरा जिले में अवैध मुरूम खनन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायत जेवरी और भोइनाभाठा में चल रहे खनन कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन एवं खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि खनिज विभाग से केवल परिवहन की अनुमति लेकर जेसीबी मशीनों से लगातार खुदाई की जा रही है, जबकि नियमों के अनुसार परिवहन अनुमति और उत्खनन अनुमति अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत जेवरी में एबीपीएल कंपनी द्वारा जितनी मात्रा के मुरूम परिवहन की अनुमति ली गई थी, उससे कहीं अधिक खुदाई और परिवहन किया जा चुका है। इस संबंध में ग्रामीणों ने कलेक्टर को लिखित शिकायत भी दी, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में भारी नाराजगी है।
वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत भोइनाभाठा में शासकीय बांध के समतलीकरण के नाम पर खनिज विभाग द्वारा लगभग 6000 घन मीटर मुरूम परिवहन की अनुमति दिए जाने की बात सामने आई है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि निर्धारित मात्रा से कहीं अधिक मुरूम का परिवहन किया जा चुका है और उसे निजी प्लांटों में बेचा जा रहा है।
जल संसाधन विभाग ने झाड़ा पल्ला, बढ़े सवाल
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिस शासकीय बांध क्षेत्र से मुरूम निकाले जाने का आरोप है, उसके संबंध में जब जल संसाधन विभाग से जानकारी ली गई तो विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके द्वारा ऐसी किसी भी प्रकार की अनुमति जारी नहीं की गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि यदि संबंधित भूमि या बांध क्षेत्र के स्वामित्व वाले विभाग से अनुमति नहीं ली गई, तो आखिर खनन और परिवहन की प्रक्रिया किस आधार पर संचालित की जा रही है?
परिवहन अनुमति लेकर खुदाई कैसे?
ग्रामीणों और जानकारों का कहना है कि केवल परिवहन अनुमति के आधार पर बड़े पैमाने पर जेसीबी लगाकर खुदाई करना नियमों के विपरीत प्रतीत होता है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित कंपनियों और ठेकेदारों को उत्खनन की स्वीकृति किस स्तर से प्राप्त हुई और यदि नहीं हुई, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
प्रशासन और विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
लगातार शिकायतों और आरोपों के बावजूद प्रशासन एवं खनिज विभाग की ओर से अब तक कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो शासकीय भूमि, बांधों और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस पूरे मामले की शिकायत खनिज मंत्री, संभागीय आयुक्त, संचालक भू-अभिलेख एवं खनिज विभाग तथा राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों से करेंगे।
जनता के तीखे सवाल
परिवहन अनुमति लेकर जेसीबी से उत्खनन कैसे किया जा रहा है?
जेवरी और भोइनाभाठा में वास्तविक खुदाई की मात्रा कितनी है?
क्या निर्धारित सीमा से अधिक मुरूम का परिवहन हुआ है?
जल संसाधन विभाग की अनुमति के बिना शासकीय बांध क्षेत्र में कार्य कैसे हुआ?
शिकायतों के बावजूद प्रशासन और खनिज विभाग मौन क्यों हैं?
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह कथित अवैध खनन कारोबार?
निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, मुरूम परिवहन एवं उत्खनन से संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच तथा दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाता है या फिर अवैध खनन को लेकर उठ रहे सवाल यूं ही अनुत्तरित रह जाते हैं।समाचार में उल्लिखित आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हैं। संबंधित विभागों एवं कंपनियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जायेगा।












