एटा नगर पालिका के वाहनों की फिटनेस और पीयूसीसी पर उठे सवाल

नियम सबके लिए बराबर! एटा नगर पालिका के वाहनों की फिटनेस और पीयूसीसी पर उठे सवाल

जिला संवादाता काव्यांश रावत एटा। सड़क पर निजी वाहनों के खिलाफ फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) को लेकर लगातार अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन अब नगर पालिका परिषद एटा के कुछ वाहनों के दस्तावेजों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार नगर पालिका के कई वाहन ऐसे हैं जिनकी फिटनेस अथवा प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त हो चुकी है। यदि ये वाहन सार्वजनिक सड़कों पर संचालित हो रहे हैं तो यह मोटर वाहन अधिनियम और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अनुरूप नहीं माना जाएगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद एटा का टाटा टैंकर (UP82BT1054) का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र वर्ष 2025 में समाप्त हो चुका है। वहीं कूड़ा संग्रहण में लगे वाहन UP82AT1778 और UP82AT1775 का पीयूसीसी वर्ष 2022 से तथा फिटनेस प्रमाणपत्र वर्ष 2023 से समाप्त बताया जा रहा है। इसके अलावा कूड़ा उठाने में प्रयुक्त जेसीबी (UP82T1792) की फिटनेस वर्ष 2016 में ही समाप्त होने की बात सामने आई है।
सरकारी वाहनों पर भी लागू हैं वही नियम
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 56 के अनुसार कोई भी परिवहन वाहन वैध फिटनेस प्रमाणपत्र के बिना सार्वजनिक सड़क पर नहीं चलाया जा सकता। यह प्रावधान निजी, सरकारी, अर्द्धसरकारी, नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत सहित सभी परिवहन वाहनों पर समान रूप से लागू होता है। केवल सरकारी विभाग का वाहन होने के कारण किसी प्रकार की सामान्य छूट का प्रावधान नहीं है।
इसी प्रकार केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत प्रत्येक वाहन के लिए वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) अनिवार्य है। बिना पीयूसीसी के वाहन का संचालन नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
कार्रवाई का अधिकार परिवहन विभाग और पुलिस दोनों को
वाहनों की फिटनेस, परमिट, पंजीकरण और अन्य दस्तावेजों की जांच का अधिकार परिवहन विभाग के साथ-साथ यातायात पुलिस और अधिकृत पुलिस अधिकारियों को भी प्राप्त है। यदि कोई परिवहन वाहन बिना वैध फिटनेस या पीयूसीसी के संचालित पाया जाता है तो उसके विरुद्ध चालान, वाहन जब्ती अथवा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। यह प्रावधान सरकारी विभागों के वाहनों पर भी समान रूप से लागू होता है।
सड़क सुरक्षा और पर्यावरण पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि फिटनेस प्रमाणपत्र समाप्त होने के बाद वाहन का तकनीकी परीक्षण नहीं हो पाता, जिससे ब्रेक, स्टीयरिंग, सस्पेंशन, टायर और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों में खराबी की आशंका बढ़ जाती है। वहीं बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहन निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं करते, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ने का खतरा रहता है।
समान कार्रवाई की उठी मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि निजी वाहनों के खिलाफ बिना फिटनेस और पीयूसीसी के नियमित रूप से चालान किए जाते हैं। ऐसे में यदि नगर पालिका या किसी अन्य सरकारी विभाग के वाहन भी बिना वैध दस्तावेजों के संचालित हो रहे हैं, तो उनके विरुद्ध भी समान कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए और किसी भी स्तर पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

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