सफलता की कहानी,आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सतर्कता और समय पर उपचार से शिवा को मिला नया जीवन
संवाददाता सायरा सूर्यवंशी एनसीआर नोएडा
दिनांक: 28.07.2026 गाजियाबाद।कभी गंभीर कुपोषण और जटिल बीमारी से जूझ रहे खोड़ा कॉलोनी के वंदना विहार निवासी छोटे बालक शिवा का जीवन आज पूरी तरह बदल चुका है। समय पर पहचान, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के सतत प्रयास और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी समन्वय ने उसे नया जीवन दिया है। यह कहानी न केवल सरकारी योजनाओं की सफलता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जागरूकता और सही समय पर लिया गया निर्णय किसी परिवार की तकदीर बदल सकता है।शिवा की माता श्रीमती नीतू संयुक्त परिवार में 14 सदस्यों के साथ रहती हैं। उनके पति फलों की ठेली लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आय के कारण परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा था। इसी बीच उनके छोटे बेटे शिवा का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया। 19 माह की आयु तक वह न तो बोल पाता था और न ही अपने पैरों पर खड़ा हो पाता था। खड़े होने पर उसके पैर काँपते थे तथा उसका वजन भी सामान्य से काफी कम था।आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती निर्मला ने नियमित निगरानी के दौरान शिवा की गंभीर स्थिति को पहचानते हुए उसे तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराने की सलाह दी। प्रारंभ में परिवार इसके लिए तैयार नहीं था, लेकिन आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तथा उनकी सुपरवाइज़र श्रीमती नीलम भट्ट ने परिवार को समझाकर उपचार के लिए सहमत किया। इसके बाद एंबुलेंस के माध्यम से शिवा को एनआरसी में भर्ती कराया गया।उपचार के दौरान शिवा की तबीयत अधिक बिगड़ने पर उसे सेक्टर-37, नोएडा रेफर किया गया, जहाँ से उसे लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल, दिल्ली भेजा गया। चिकित्सकीय जांच में उसके फेफड़ों में पानी भरने की गंभीर समस्या सामने आई। लगभग 10 दिनों तक चले उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ और आगे की विशेषज्ञ चिकित्सा के लिए उसे कलावती शरण बाल चिकित्सालय, नई दिल्ली भेजा गया।कलावती अस्पताल में शिवा की एमआरआई सहित सभी आवश्यक जांचें कराई गईं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उसका समुचित उपचार किया गया। लगातार उपचार और देखभाल का सकारात्मक परिणाम सामने आया। आज शिवा न केवल सामान्य रूप से चल और बोल पा रहा है, बल्कि उसका वजन भी सामान्य हो चुका है और वह अन्य बच्चों की तरह स्वस्थ एवं सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा है।इस पूरे उपचार की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को इलाज पर कोई खर्च नहीं करना पड़ा। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और विभिन्न संस्थानों के समन्वित प्रयासों से शिवा को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध हुई।अपनी खुशी व्यक्त करते हुए नीतू कहती हैं, “यदि हमारी आंगनवाड़ी दीदी समय पर शिवा की स्थिति को नहीं पहचानतीं और हमें लगातार प्रेरित नहीं करतीं, तो शायद आज हमारा बेटा स्वस्थ नहीं होता। उनकी मेहनत, मार्गदर्शन और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदौलत ही शिवा को नया जीवन मिला है। इसके लिए मैं दिल से उनका आभार व्यक्त करती हूँ।”यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका, समय पर स्वास्थ्य जांच, पोषण सेवाओं और सरकारी चिकित्सा सुविधाओं का प्रभावी समन्वय बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। ऐसी प्रेरणादायक कहानियाँ समाज में जागरूकता बढ़ाने और पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करती हैं।












