तिरंगा तो फहराया, अब पंचायत भवन सालभर खुलेगा कब?

तिरंगा तो फहराया, अब पंचायत भवन सालभर खुलेगा कब?

आज 15 अगस्त के अवसर पर गांव-गांव में तिरंगा फहराया गया। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर पंचायत भवनों में भी ध्वजारोहण हुआ और देशभक्ति का संदेश दिया गया। लेकिन इसी के साथ ग्रामीण व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आता है—जिन पंचायत भवनों का निर्माण गांव की समस्याओं के समाधान और ग्रामीणों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए किया गया है, वे नियमित रूप से कितने दिन खुलते हैं?

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भवनों को गांव के स्थानीय प्रशासन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया गया है। यहां ग्राम प्रधान, पंचायत सहायक और संबंधित कर्मचारी बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुन सकें, पंचायत की बैठकें हो सकें और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी व सुविधाएं लोगों तक पहुंच सकें।

लेकिन कई स्थानों पर पंचायत भवनों के नियमित संचालन को लेकर ग्रामीणों के बीच सवाल उठते रहे हैं। कहीं भवन लंबे समय तक बंद रहने की शिकायत मिलती है तो कहीं उसके नियमित उपयोग को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती।

मरम्मत और रखरखाव पर खर्च, उपयोग पर भी हो निगरानी

पंचायत भवनों की मरम्मत, रंगाई-पुताई, साफ-सफाई और रखरखाव पर समय-समय पर पंचायत स्तर से धन खर्च किया जाता है। इसके अलावा पंचायत भवनों में कम्प्यूटर, प्रिंटर, फर्नीचर और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं मिल सकें।

ऐसे में यह जरूरी है कि इन संसाधनों के उपयोग और रखरखाव की भी नियमित समीक्षा हो। ग्रामीण क्षेत्रों में कभी-कभी ऐसी शिकायतें सामने आती हैं कि पंचायत भवन में उपलब्ध उपकरणों का नियमित इस्तेमाल नहीं हो रहा है या वे पंचायत भवन के बजाय किसी अन्य स्थान पर रखे हुए हैं।

इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति संबंधित अधिकारियों द्वारा मौके पर सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। इसलिए प्रशासन को समय-समय पर पंचायत भवनों का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी धन से उपलब्ध कराए गए संसाधन वास्तव में ग्रामीणों के काम आ रहे हैं।

पंचायत भवन सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी के लिए नहीं

पंचायत भवन में सिर्फ राष्ट्रीय पर्वों पर तिरंगा फहराना ही पर्याप्त नहीं है। इसकी असली उपयोगिता तब है, जब यह पूरे वर्ष ग्रामीणों के लिए उपलब्ध रहे।

गांव के किसी व्यक्ति को पेंशन की जानकारी चाहिए, किसी परिवार को आवास योजना की समस्या है, किसी मजदूर को मनरेगा से संबंधित शिकायत है या गांव में सड़क, नाली, पानी और सफाई जैसी समस्या है—तो उसे अपनी बात रखने के लिए पंचायत भवन और पंचायत व्यवस्था तक आसानी से पहुंच मिलनी चाहिए।

इसलिए जरूरत है कि प्रत्येक पंचायत भवन के खुलने का समय स्पष्ट किया जाए, पंचायत सहायक की उपलब्धता सुनिश्चित हो और कम्प्यूटर समेत अन्य सरकारी संसाधनों का नियमित उपयोग हो।

आज स्वतंत्रता दिवस पर पंचायत भवनों पर तिरंगा शान से लहरा रहा है। उम्मीद यही होनी चाहिए कि 15 अगस्त के बाद भी इन पंचायत भवनों के दरवाजे ग्रामीणों के लिए खुले रहें।

क्योंकि पंचायत भवन केवल एक सरकारी इमारत नहीं, बल्कि गांव की समस्याओं को सुनने और समाधान तक पहुंचाने का स्थानीय केंद्र होना चाहिए।

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